Yogi Adityanath spoke on migration and barren farmlands in Uttarakhand, saying, Culture and heritage are under threat.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड में बढ़ते पलायन व बंजर होते खेतों पर चिंता जताते हुए कहा कि पलायन केवल खेती को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपराओं व पूर्वजों की विरासत को भी धीरे-धीरे समाप्त भी कर रहा है। योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव पंचूर में आयोजित श्री विष्णु पंचदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि लोग गांव, जमीन व अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय भी है। योगी ने कहा कि जो खेत कभी फसलों से लहलहाते थे, आज वहां झाड़ियां भी उग आई हैं। कई गांवों में खेती पूरी तरह से बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले भी जंगली जानवर होते थे, लेकिन लोग खेती और परंपराओं से भी जुड़े रहते थे। अब लोगों को खेती में नए विकल्प अपनाने की जरूरत भी है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को बागवानी की ओर बढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि अगर पारंपरिक फसलें नुकसान भी पहुंचा रही हैं तो फल उत्पादन बेहतर विकल्प भी हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंचूर के पास पोखरी गांव में बाबा रामदेव द्वारा खुमानी, आड़ू व किन्नू जैसे फलों का सफल उत्पादन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा भी मिल रही है।
कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा भी किया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज विष्णु पंचदेव मंदिर बना है, वहां पहले सड़क निर्माण के दौरान बार-बार जेसीबी मशीन खराब भी हो रही थी। पुराने इतिहास व नक्शे देखने पर पता चला कि वह स्थान पहले देवस्थल था। इसके बाद सड़क की दिशा बदली गई व मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया, जिसके बाद निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के ही पूरा हो गया।
योगी ने गांवों में धार्मिक परंपराओं के कमजोर पड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में हर साल जागर आयोजित भी होते थे, लेकिन अब यह परंपरा कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की पूजा व जागर जैसी परंपराएं समाज और संस्कृति को जीवित रखती हैं।
कार्यक्रम में सतपाल महाराज, चिदानंद सरस्वती और बाबा रामदेव ने भी योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए उनके नेतृत्व और सांस्कृतिक योगदान की प्रशंसा भी की।
