Raj Singh, an accused in the Gurdwara Manji Sahib firing incident, dies in police custody; family reaches Sudhar police station.
गुरुद्वारा मंजी साहिब गोलीकांड के आरोपी शूटर राज सिंह उर्फ राजू की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। फिरोजपुर के गांव नूरपुर माछीवाड़ा निवासी राजू को लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सोमवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। रक्तचाप कम होने की शिकायत के बाद उसे पहले सुधार के सरकारी और निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे लुधियाना के ग्लोबल हार्ट अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस की ओर से मौत की वजह रक्तचाप कम होना बताई जा रही है, लेकिन हिरासत के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, जगरांव के सीआईए स्टाफ में पूछताछ के बाद राजू की हालत बिगड़ी थी। हालांकि, इस संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजू की गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। इसके बाद उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया था। अब उसकी हिरासत में मौत से पहले से संवेदनशील इस गोलीकांड ने नया मोड़ ले लिया है। उधर, राजू का परिवार थाना सुधार पहुंच गया है। परिजनों के पहुंचने के बाद वहां हंगामे की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल शव लुधियाना के ग्लोबल हार्ट अस्पताल में है और पुलिस आवश्यक कागजी कार्रवाई कर रही है।
15 साल में सात मुकदमे, एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट में भी नाम
राज सिंह उर्फ राजू का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2010 से 2025 के बीच उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल सात मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें फिरौती, चोरी, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार, 15 मई 2010 को थाना सदर कोटकपूरा में आईपीसी की धारा 384 के तहत मुकदमा नंबर 53 दर्ज हुआ था। 18 नवंबर 2011 को थाना सिटी फरीदकोट में धारा 382 और 411 के तहत मुकदमा नंबर 310 दर्ज किया गया। 31 मार्च 2016 को थाना शाहकोट में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 22/61/85 और आर्म्स एक्ट की धाराओं 25/54/59 के तहत मुकदमा नंबर 72 दर्ज हुआ।
इसके बाद 23 जनवरी 2020 को थाना फरीदकोट में आईपीसी की धाराओं 385/511 और आर्म्स एक्ट की धाराओं 25/27/54/59 के तहत मुकदमा नंबर 28 दर्ज किया गया। 27 अक्टूबर 2022 को थाना सदर जीरा में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21/61/85 के तहत मुकदमा नंबर 171 दर्ज हुआ। वर्ष 2025 में भी उसके खिलाफ तीन महीने के अंतराल में दो मामले दर्ज हुए। इनमें 8 मार्च को मुकदमा नंबर 19 और 7 जून को मुकदमा नंबर 65 शामिल हैं। दोनों मामले एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किए गए थे।
विदेशी नंबर से धमकी के बाद गुरुद्वारा मंजी साहिब में फायरिंग
मामला 27-28 अक्टूबर की रात करीब 3:15 बजे का है। राजोआणा कलां स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा मंजी साहिब में मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने मुख्य सेवादार संत बाबा बलदेव सिंह के रिहायशी कमरे पर गोलियां चलाई थीं। एक गोली शीशे और लकड़ी के दरवाजे को पार करते हुए दीवार में जा धंसी। संयोगवश उस समय बाबा बलदेव सिंह बाथरूम में इशनान कर रहे थे और बाल-बाल बच गए।
पुलिस जांच में विदेशी इंटरनेट नंबर से जान से मारने की धमकियां देने और कथित तौर पर फिरौती मांगने की बात सामने आई थी। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर बाबा की गतिविधियों पर नजर रखकर वारदात को अंजाम देने की साजिश रची गई। पुलिस ने करीब 200 किलोमीटर के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और साइबर जांच के साथ खुफिया सूचनाओं के आधार पर फिरोजपुर में दबिश देकर राजू को गिरफ्तार किया था। गुरदासपुर के दो अन्य संदिग्धों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की जानकारी सामने आई थी।
गगड़ा गोलीकांड का मामला अलग, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल
इससे पहले गांव गगड़ा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गोपालसर साहिब के मुख्य गेट पर भी नकाबपोश हमलावर ने दो गोलियां चलाई थीं और धमकी भरा पत्र छोड़ा था। इस मामले में पुलिस ने संदीप सिंह उर्फ सोनी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पुलिस ने दावा किया था कि मुख्य सेवादार बाबा अमरजीत सिंह ने कथित तौर पर सुरक्षा और असलहा लाइसेंस हासिल करने के उद्देश्य से फायरिंग की साजिश में भूमिका निभाई थी। बाद में बाबा अमरजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हथियार, मैगजीन, मोटरसाइकिल और वारदात में इस्तेमाल किए गए कपड़े बरामद करने की जानकारी दी थी। हालांकि, पुलिस ने दोनों गुरुद्वारों में हुई गोलीबारी की घटनाओं को अलग-अलग मामले माना है।
लगातार दो दिनों में दो ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर फायरिंग और अब मंजी साहिब गोलीकांड के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। पुलिस के सामने विदेशी नंबर से धमकी और फिरौती के कथित नेटवर्क की जांच के साथ-साथ राजू की हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने और मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की चुनौती है। वहीं, परिवार के थाना सुधार पहुंचने के बाद घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।
