सहकारिता से आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर बड़ा कदम: 11 लाख लोगों को ब्याजमुक्त ऋण, 100% डिजिटल हुई समितियां, महिलाओं को मिला 33% आरक्षण
देहरादून: राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने सहकारिता विभाग की उपलब्धियां भी साझा कीं। राज्य गठन के बाद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहकारिता विभाग ने अहम भूमिका भी निभाई है। बीते 25 वर्षों में विभाग ने किसानों, महिलाओं, काश्तकारों, कारीगरों व युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं भी लागू की हैं। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और माधो सिंह भंडारी सहकारी सामूहिक खेती योजना जैसी पहल ने सहकारिता को जनांदोलन का स्वरूप भी दिया है।
सहकारिता में प्रशासनिक सुधार
राज्य गठन के समय जहां सहकारिता विभाग में 528 पद भी स्वीकृत थे, अब यह संख्या बढ़कर 607 हो गई है। सहकारी समितियों की संख्या 1800 से बढ़कर 6346 हो गई है, जबकि जिला सहकारी बैंक शाखाएं 207 से बढ़कर 330 तक हो गई हैं। सहकारिता विभाग ने अपने विधिक और प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सहकारी न्यायाधिकरण, सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण व सहकारी संस्थागत सेवामंडल का गठन किया है।
पारदर्शी भर्ती और मानव संसाधन विकास
विभाग में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत 2018-19 में आईबीपीएस के माध्यम से 597 अभ्यर्थियों को नियुक्त भी किया गया, जबकि 177 पदों पर भर्ती प्रस्तावित है। इसके अलावा, विभिन्न कोटे के अंतर्गत 475 कार्मिकों की नियुक्ति भी की गई है।
11 लाख से अधिक लोगों को ब्याजमुक्त ऋण
दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत वर्ष 2017 से सितंबर 2025 तक 11.34 लाख लाभार्थियों व 6413 स्वयं सहायता समूहों को 6957.88 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण वितरित किया गया है।
किसानों को उपज का उचित मूल्य
राज्य सहकारी संघ द्वारा 239 क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों से 67,000 क्विंटल से अधिक मिलेट्स की खरीद कर 26.52 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया है।
घस्यारी योजना से महिलाओं को राहत
मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के तहत प्रदेश की 11 जिलों की 182 सहकारी समितियों के माध्यम से 5.5 लाख मीट्रिक टन सायलेज वितरित भी किया गया, जिससे 54 हजार महिलाएं लाभान्वित हुईं।
सामूहिक खेती से उपजाऊ हुई बंजर भूमि
माधो सिंह भंडारी सामूहिक खेती योजना के तहत 13 जिलों में 24 सहकारी समितियों से जुड़े 2400 किसानों ने 1235 एकड़ भूमि पर खेती भी शुरू की है।
आईटीबीपी और सेना तक पहुंचाए जा रहे स्थानीय उत्पाद
“वाइब्रेंट विलेज” योजना के तहत स्थानीय सहकारी समितियों के माध्यम से सेना व आईटीबीपी को पशु, मछली, सब्जियां व स्थानीय उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पैक्स समितियों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण
प्रदेश की सभी 670 पैक्स समितियों को कंप्यूटरीकृत किया गया है, जिससे पारदर्शिता व दक्षता में सुधार हुआ है।
महिला सशक्तिकरण में बड़ी पहल
सहकारी समितियों व बैंकों की प्रबंध समितियों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया है, जिससे महिलाओं की सहभागिता व नेतृत्व को बढ़ावा मिला है।
सहकारी बैंकों का एनपीए घटा
राज्य गठन के समय सहकारी बैंकों का सकल एनपीए 48.38 करोड़ रुपये था, जो 2025 में घटकर 6.90 करोड़ रुपये भी रह गया है।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा,
“राज्य सरकार सहकारिता को जनांदोलन के रूप में विकसित कर रही है। पारदर्शिता, जवाबदेही व सुशासन के साथ आत्मनिर्भर उत्तराखंड का लक्ष्य सहकारिता के माध्यम से साकार भी किया जा रहा है।”