Theft of elephant tusks in Lansdowne Forest Division causes a stir; disposal rules have remained unimplemented for three years.
लैंसडौन वन प्रभाग में हाथी दांत चोरी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। लालढांग रेंज में रखे गए 15 हाथी दांतों में से पांच दांत चोरी हो गए। इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही वन्यजीव अंगों के सुरक्षित रखरखाव और निपटान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2023 में वन्यजीव अंगों के निपटान के लिए नियम बनाए थे, लेकिन करीब तीन साल बीतने के बाद भी इन पर अमल शुरू नहीं हो पाया।
वन विभाग तस्करों से बरामद वन्यजीव अंगों के साथ ही प्राकृतिक रूप से मृत होने वाले वन्यजीवों और विभिन्न कारणों से टूटकर गिरे हाथी दांतों को भी अपने कार्यालयों में सुरक्षित रखता है। इसके चलते प्रदेश के अलग-अलग वन कार्यालयों में सैकड़ों हाथी दांत जमा हैं। इनमें कुछ मामले करीब ढाई दशक पुराने भी बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राजाजी टाइगर रिजर्व के विभिन्न कार्यालयों में करीब 215 हाथी दांत रखे हैं, जबकि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी 140 से अधिक हाथी दांत होने की बात सामने आई है।
हाथी दांत चोरी की घटना के बाद वन मुख्यालय ने अब सभी वन प्रभागों और टाइगर रिजर्व से हाथी दांतों का पूरा ब्योरा मांगा है। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव कार्यालय की ओर से इसके लिए दो अलग-अलग प्रारूप जारी किए गए हैं। पहले प्रारूप में उन हाथी दांतों की जानकारी मांगी गई है, जिनसे जुड़े मामले अदालत में विचाराधीन नहीं हैं, जबकि दूसरे प्रारूप में न्यायालय से संबंधित मामलों का विवरण मांगा गया है।
वन विभाग को जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्थानों पर टीम भेजकर हाथी दांतों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2023 के नियमों के तहत इनके निपटान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए निर्धारित कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों समेत अन्य संबंधित लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
इस संबंध में अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडे ने बताया कि सभी वन प्रभागों और टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से उनके कार्यालयों में रखे हाथी दांतों की जानकारी दो अलग-अलग प्रारूपों में मांगी गई है। सूचना प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
