Mohbbewala slope becomes a hotspot for accidents; 15 crashes claim six lives, while departmental surveys prove ineffective.
देहरादून के मोहब्बेवाला ढलान पर ट्रकों की तेज रफ्तार लगातार जानलेवा साबित हो रही है। इस साल अब तक यहां 15 हादसे हो चुके हैं, जिनमें छह लोगों की मौत हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि ढलान पर उतरते समय भारी वाहनों की रफ्तार अचानक बढ़ने की समस्या से सभी संबंधित विभाग वाकिफ हैं, लेकिन इसके बावजूद हादसों को रोकने का कोई ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आया है। एनएचएआई, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग लगातार जांच और सर्वे कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मोहब्बेवाला ढलान पर हादसों का सिलसिला करीब दो साल पहले शुरू हुआ था। 14 नवंबर को यहां तेज रफ्तार से आ रहा एक कंटेनर चेकपोस्ट के सामने वाहनों पर पलट गया था। इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके बाद लगातार भारी वाहनों के अनियंत्रित होने की घटनाएं सामने आती रहीं। कभी ईंटों से भरा ट्रक पलटा तो कभी टाइल लेकर जा रहे ट्रक ने सड़क किनारे दीवार को टक्कर मार दी। इन हादसों में आसपास के कई प्रतिष्ठानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थिति यह है कि बीते 20 सितंबर से अब तक यहां सात हादसे हो चुके हैं, जिनमें पांच लोगों की मौत हुई है।
हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों ने सर्वे और जांच की प्रक्रिया तो शुरू की, लेकिन समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नजर नहीं आया है। अलग-अलग सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों से सर्वे कराया जा रहा है। किसी एजेंसी की रिपोर्ट का इंतजार है तो किसी ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो महीने का समय मांगा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डाट काली टनल से मोहब्बेवाला के बीच सड़क का सर्वे कराने की जिम्मेदारी केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) को दी है। सीआरआरआई ने अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का समय मांगा है। वहीं, परिवहन विभाग ने जेपीआरआई संस्था से सर्वे कराया है। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इससे पहले एनएचएआई की ओर से एक थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया गया था। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के मुताबिक, ऑडिट करने वाली संस्था ने सड़क के डिजाइन को सही बताया था। इसके बाद हादसों पर नियंत्रण के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात कही गई। ऑडिट रिपोर्ट में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ाने और मौके पर तैनाती मजबूत करने के साथ ही यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने की सिफारिश की गई थी।
वहीं, पुराने और नए सड़क एलाइनमेंट की तुलना में भी अंतर सामने आता है। पुराने मार्ग पर ढलान कम और चरणबद्ध था, जिससे वाहनों की रफ्तार करीब 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा तक नियंत्रित रहती थी। सड़क पर पांच घुमावदार मोड़ थे, जो प्राकृतिक गति नियंत्रक की तरह काम करते थे। इससे वाहन चालकों को गति कम करने और ब्रेक को ठंडा होने का समय मिल जाता था। पुराने मार्ग पर दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण संकरा रास्ता और ओवरटेकिंग की कोशिशें थीं।
