On the instructions of the Chief Minister, the administration took a big attack on the education mafia, strict action for the first time in Dehradun
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत देहरादून जिला प्रशासन ने शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त अनियमितताओं व अवैध वसूली के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए बड़ी कार्रवाई भी की है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए शिक्षा माफियाओं के हौसले पस्त भी कर दिए गए हैं।
जिला प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब फीस वृद्धि के नाम पर मनमानी करने वाले स्कूल बैकफुट पर भी आ गए हैं। प्रशासन की सक्रियता का परिणाम यह है कि स्कूलों का फीस स्ट्रक्चर पारदर्शी होने लगा है और शिकायतों में भी कमी आई है।
प्रसिडेंसी इंटरनेशनल स्कूल पर ₹5.20 लाख का जुर्माना
प्रशासन की कार्रवाई का ताजा उदाहरण भानियावाला स्थित प्रसिडेंसी इंटरनेशनल स्कूल है, जहां 100 से अधिक अभिभावकों ने मनमानी फीस वृद्धि की शिकायत भी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि यह स्कूल बिना मान्यता नवीनीकरण के संचालित भी हो रहा था।
डीएम कार्यालय से बार-बार बुलाने के बावजूद जब स्कूल प्रबंधन उपस्थित ही नहीं हुआ, तब दस्तावेजों की गहन जांच की गई। पता चला कि स्कूल को केवल मार्च 2020 से मार्च 2025 तक की ही मान्यता प्राप्त थी, किंतु नवीनीकरण के लिए अभी तक कोई आवेदन ही नहीं किया गया है।
इस पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18(5) के तहत कार्रवाई करते हुए स्कूल पर 1 अप्रैल 2025 से 22 मई 2025 तक के 52 दिनों के लिए प्रतिदिन ₹10,000 की दर से कुल ₹5,20,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। यह राशि तीन कार्यदिवसों के भीतर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा इसे भू-राजस्व के रूप में वसूल भी किया जाएगा।
कई नामी स्कूलों की खुली पोल
जिला प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई के बाद अन्य कई स्कूलों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी भी है। फीस वृद्धि को लेकर बढ़ती शिकायतों पर प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही की जा रही है। पहली बार जिला स्तर पर शिक्षा माफियाओं के खिलाफ इतनी सख्त व पारदर्शी पहल देखने को भी मिली है।
अभिभावकों को मिली राहत
इस कार्रवाई से न केवल शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन स्थापित हुआ है, बल्कि अभिभावकों को भी बड़ी राहत भी मिली है, जो वर्षों से मनमानी फीस वृद्धि का विरोध भी कर रहे थे।
संवाद सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन अन्य स्कूलों की भी मान्यता, फीस संरचना और नियमों के अनुपालन की जांच कर रहा है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिक्षा में व्यावसायिक शोषण बर्दाश्त ही नहीं किया जाएगा।

