Harish Rawat said Anand Rawat should get the opportunity to contest the election, adding, "This is precisely what constitutes dynastic politics."
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने छोटे बेटे आनंद रावत के चुनाव लड़ने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि उनकी दिली ख्वाहिश है कि उनकी ‘उत्तराखंडियत’ की सोच और उत्तराखंड से उनके रिश्ते को आगे बढ़ाने वाला कोई व्यक्ति आगे आए और आनंद में इसकी संभावनाएं हैं।
अमर उजाला से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को संकेत दिया है कि जिस सीट पर कांग्रेस लंबे समय से नहीं जीती है और वहां कोई मजबूत दावेदार नहीं है, तो आनंद रावत को मौका दिया जा सकता है। आनंद ने ऐसी सीट चुनी है, जिस पर कांग्रेस वर्ष 1984 से नहीं जीती है।
रावत ने अपनी बेटी अनुपमा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हरिद्वार ग्रामीण सीट चुनी थी, जहां कांग्रेस करीब 45 साल से नहीं जीती थी। पिछली बार वह वहां से चुनाव लड़ीं और हार गईं, लेकिन आज भी मैदान में डटी हैं।
आनंद को लेकर रावत ने कहा कि जब वह यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब कई कार्यकर्ताओं को टिकट मिला, लेकिन उन्होंने खुद लालकुआं से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। 2017 में आनंद ने जसपुर को चुना, लेकिन पार्टी हित में भाजपा की चुनौती को देखते हुए उन्होंने आदेश चौहान को मजबूत प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ाया।
हरीश रावत ने कहा कि उस समय उन्होंने बेटे से कहा था- ‘वेट, योर टर्न विल कम।’ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से भी कहा है कि अगर संबंधित सीट पर कोई और मजबूत दावेदार है तो उसका हक नहीं मारा जाना चाहिए। लेकिन अगर आनंद का हक बनता है और वह जीत सकता है तो उसे चुनाव लड़ाया जाए। रावत ने अपनी बात को लेकर कहा- “बस यही परिवारवाद है।”
