BJP state and Rajya Sabha MP Mahendra Bhatt raised question in the House on piped natural gas-domestic connection
राज्यसभा में उत्तराखंड के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्य में पाइप्ड नैचुरल गैस-घरेलू कनेक्शन (पीएनजी-डी) को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। भट्ट ने इस सवाल के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में इस सुविधा के विस्तार व उत्तराखंड में इसे कहां-कहां लागू किया गया है, इसके बारे में भी जानकारी मांगी।
राज्यसभा सत्र में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 1262 में भट्ट ने केंद्रीय मंत्री से पूछा, “देश में कुल कितने राज्यों को पाइप्ड नैचुरल गैस-घरेलू (पीएनजी-डी) की सुविधाएं प्रदान की गई हैं? और उत्तराखंड राज्य में किन स्थानों को इस सुविधा से जोड़ा भी गया है?”
इस पर उत्तर देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन प्रदान करना नगर गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे प्राधिकृत कंपनियों द्वारा उनके न्यूनतम कार्य कार्यक्रम (एमडब्ल्यूपी) के अनुसार ही किया जा रहा है।
उत्तराखंड के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि पीएनजीआरबी ने राज्य में सीजीडी अवसंरचना के विकास के लिए सभी जिलों को कवर करते हुए 6 गैस क्षेत्रों (जीएज) को प्राधिकृत किया है, जिसमें उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के संयुक्त क्षेत्र में 1 गैस क्षेत्र भी शामिल है।
मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में सबसे अधिक पीएनजी कनेक्शन हरिद्वार और उधम सिंह नगर में जोड़े गए हैं, जिनका लक्ष्य क्रमशः 17,841 और 25,269 कनेक्शन हैं। इसके बाद देहरादून में 32,778 और नैनीताल जनपद में 16,373 कनेक्शन जुड़ चुके हैं। वहीं, पर्वतीय जिलों जैसे पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा व बागेश्वर में पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है।
इससे पहले, महेंद्र भट्ट ने एक अन्य अतारांकित प्रश्न संख्या 1379 में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत पंजीकरण की जानकारी मांगी थी। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड में अब तक 16,34,438 लोग इस योजना में पंजीकृत हो चुके हैं।
इन सवालों के माध्यम से भट्ट ने प्रदेशवासियों को महत्वपूर्ण योजनाओं की स्थिति और प्रगति के बारे में जागरूक करने की कोशिश भी की है।
