हल्द्वानी में ट्रैफिक सिग्नल बने शोपीस, करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी यातायात व्यवस्था

हल्द्वानी। कुमाऊं का सबसे बड़ा महानगर होने के बावजूद हल्द्वानी की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था बेतरतीब ही है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल अब शोपीस ही बनकर रह गए हैं। शहर के 13 से अधिक चौराहों पर लगी ये लाइटें या तो बंद हैं या गलत सिग्नल ही देती हैं। नतीजतन, यहां यातायात का संचालन आज भी पुलिस व होमगार्ड जवानों के इशारों पर ही निर्भर है।

राजधानी से लेकर कुमाऊं मुख्यालय तक के आला अधिकारी, मंत्री, सांसद व विधायक इसी शहर में निवास करते हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले भी अक्सर इन सड़कों से गुजरते हैं, बावजूद इसके ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम ही नहीं उठाया गया।

वर्ष 2020-21 में करीब 90 लाख रुपये की लागत से शहर के 13 प्रमुख चौराहों—आईटीआई तिराहा, टीपीनगर, सेंट्रल हॉस्पिटल, कुसुमखेड़ा, पीलीकोठी, लालडांठ, नरीमन चौराहा व डिग्री कॉलेज आदि—पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को भी सौंपी गई, लेकिन कुछ ही महीनों में सभी लाइटें बंद ही पड़ी रह गईं। कई जगहों पर तो सड़क चौड़ीकरण के दौरान लाइटें हटा दी गईं और अब तक दोबारा से नहीं लगाई गई हैं।

मुखानी चौराहे पर 2014-15 में ट्रायल के तौर पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल कुछ दिन चलने के बाद गलत सिग्नल भी देने लगे। इससे लगातार जाम की स्थिति बनने लगी और नागरिकों के विरोध के बाद लाइटें बंद भी कर दी गईं। तब से अब तक यह सिस्टम चालू ही नहीं हो सका है।

शहर में कई जगह ट्रैफिक सिग्नल बिना समन्वय के लगाए गए हैं। कभी लाल, कभी पीली तो कभी हरी बत्ती जलने से सैलानियों में भ्रम की स्थिति भी बनती है। बाहर से आने वाले लोग लाल बत्ती पर वाहन रोक देते हैं, जबकि उनके बगल से दूसरी दिशा के वाहन सिग्नल तोड़ते हुए ही गुजर जाते हैं।

स्थानीय निवासी गोपाल भट्ट का कहना है, “ट्रैफिक लाइटों के नाम पर लाखों रुपये खर्च भी हुए, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी। यह जनता के पैसे की बर्बादी ही है।” वहीं गौरव जोशी का कहना है, “हल्द्वानी अब महानगर बन चुका है, लेकिन यातायात व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर ही  है। ट्रैफिक लाइटें चालू होना बेहद ही जरूरी है।”

लोनिवि इलेक्ट्रिक एवं मैकेनिकल खंड के अधीक्षण अभियंता निशांत नेगी ने बताया कि विभाग ने लाइटें लगाकर उन्हें ट्रैफिक पुलिस को भी सौंप दिया था। अब उनका संचालन पुलिस प्रशासन के ही अधीन है।

एसपी ट्रैफिक जगदीश चंद्र ने कहा कि शहर में नई ट्रैफिक लाइटें लगाने की तैयारी भी है। इसके लिए सर्वे पूरा हो चुका है और तहसील में कंट्रोल रूम स्थापित कर इनका संचालन भी किया जाएगा।

डीएम नैनीताल ललित मोहन रयाल ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण कार्य के बाद नई लाइटें भी लगाई जाएंगी। इससे यातायात व्यवस्था में सुधार होगा व जनता को राहत मिलेगी।