उत्तराखंड में JICA वन परियोजना का दूसरा चरण जल्द, 1500 करोड़ से मिलेगा हरित विकास को बढ़ावा

उत्तराखंड में वन संरक्षण, आजीविका संवर्धन व जैव विविधता को मजबूत करने वाली JICA वित्तपोषित उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना अब दूसरे चरण में प्रवेश करने भी जा रही है। पहले चरण की सफलता के बाद फेज-2 की तैयारी भी तेज हो गई है। इसी सिलसिले में JICA इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने वन मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर परियोजना की प्रगति व आगामी योजना पर विस्तार से चर्चा भी की।

मौजूदा समय में यह परियोजना राज्य के 13 वन प्रभागों की 36 रेंजों व 839 वन पंचायतों में संचालित भी हो रही है। पहले चरण में 38 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 38,393 हेक्टेयर क्षेत्र में ईको-रेस्टोरेशन कार्य पूरा भी किया जा चुका है। वहीं 807 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च भी की जा चुकी है, जो परियोजना की मजबूत प्रगति को भी दर्शाता है।

परियोजना के तहत 1503 स्वयं सहायता समूह व 20 क्लस्टर फेडरेशन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। सेब उत्पादन, मधुमक्खी पालन व अखरोट रोपण जैसी 18 वैल्यू चेन गतिविधियों ने स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका को नई मजबूती भी दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में भू-कटाव रोकने के लिए जापानी तकनीक आधारित मॉडल साइट्स पर भी काम भी तेजी से चल रहा है।

अब वर्ष 2026 से 2035 तक प्रस्तावित दूसरे चरण की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार भी कर ली गई है। इसकी अनुमानित लागत 1500 करोड़ रुपये रखी गई है, जिसमें 85 प्रतिशत हिस्सा JICA व 15 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। फेज-2 में 47 वन रेंजों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जहां ईको-रेस्टोरेशन, जड़ी-बूटी रोपण, कृषि वानिकी, आजीविका विकास व मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम पर विशेष जोर भी दिया जाएगा।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि

यह परियोजना उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सफल मॉडल भी बन रही है और दूसरा चरण इसे नई ऊंचाई देगा।