Rajasthan Municipal Corporation Elections: Political arithmetic for Deputy Mayor to shift again today.
राजस्थान के सात नगर निगमों में सोमवार को मेयर चुनाव के बाद अब 22 सितंबर को डिप्टी मेयर के चुनाव पर सबकी नजर है। मेयर चुनाव के नतीजों में कई जगह वार्डों की संख्या और शीर्ष पद के परिणाम में अंतर देखने को मिला। ऐसे में डिप्टी मेयर चुनाव में भी निर्दलीय, बागी और क्रॉस-वोटिंग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सात नगर निगमों में हुए मेयर चुनाव में भाजपा ने छह जगह जीत दर्ज की, जबकि बीकानेर में कांग्रेस मेयर बनाने में सफल रही। अब डिप्टी मेयर चुनाव में खास तौर पर उन निगमों में मुकाबला दिलचस्प रहेगा, जहां किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है या मेयर चुनाव के दौरान पार्षदों के समर्थन का समीकरण बदल गया।
अजमेर: यहां कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद हैं। मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले। अब डिप्टी मेयर चुनाव में यह देखना अहम होगा कि मेयर चुनाव में भाजपा के पक्ष में आए पार्षदों का समर्थन बरकरार रहता है या समीकरण दोबारा बदलता है।
पाली: कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 पार्षद हैं। मेयर चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार को महज तीन वोट मिले, जबकि कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर मेयर बनीं। ऐसे में डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्षदों के रुख और हिंगड़ के साथ गए पार्षदों की भूमिका पर नजर रहेगी।
अलवर: यहां भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और निर्दलीय 13 पार्षद हैं। मेयर चुनाव में भाजपा को निर्दलीयों और बसपा पार्षद का समर्थन मिला था। अब डिप्टी मेयर चुनाव में भी यही समर्थन कायम रहता है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा।
उदयपुर: भाजपा के 53 पार्षद हैं और उसे तीन निर्दलीयों का समर्थन भी मिला। मेयर चुनाव में पारस सिंघवी को 55 वोट मिले। ऐसे में डिप्टी मेयर पद के लिए भाजपा के पास मजबूत संख्याबल दिखाई देता है। अब पार्टी के भीतर पद के दावेदार को लेकर होने वाला फैसला महत्वपूर्ण रहेगा।
बीकानेर: यहां कांग्रेस ने मेयर चुनाव में 50 वोट हासिल कर भाजपा को पीछे छोड़ा। कांग्रेस के पास वार्डों का बहुमत भी है। ऐसे में डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस अपने संख्याबल को बनाए रखते हुए बोर्ड के दूसरे महत्वपूर्ण पद पर भी नियंत्रण कायम करने की कोशिश करेगी।
भरतपुर: यहां 36 निर्दलीय पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 20 और कांग्रेस के सात पार्षद हैं। भाजपा की अनुराधा सिंह मेयर पद पर निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं। अब डिप्टी मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों का रुख निर्णायक हो सकता है और उनके समर्थन से चुनावी समीकरण बदल सकता है।
सोमवार के मेयर चुनाव ने साफ किया कि नगर निगमों में वार्डों की संख्या और शीर्ष पद का परिणाम हमेशा एक जैसा नहीं होता। अब मंगलवार का डिप्टी मेयर चुनाव इसी राजनीतिक गणित की अगली परीक्षा होगा। अजमेर, पाली, अलवर और भरतपुर में निर्दलीय व बागी पार्षदों की भूमिका पर खास नजर रहेगी, जबकि बीकानेर और उदयपुर में पार्टियां अपने मौजूदा संख्याबल को डिप्टी मेयर पद तक पहुंचाने की कोशिश करेंगी। इन चुनावों के नतीजे यह भी संकेत देंगे कि मेयर चुनाव के दौरान बने समर्थन के समीकरण स्थायी हैं या केवल शीर्ष पद तक सीमित थे।
