Jaat Review Sunny Deol's blast in the South on Mahavir Jayanti, Ranatunga's Lanka destroyed in 10 hours
रेटिंग: ★★☆☆☆ (2.5/5)
रिलीज़ डेट: 10 अप्रैल 2025
कलाकार: सनी देओल, रेजिना कसांड्रा, रणदीप हुड्डा, विनीत कुमार सिंह, संयमी खेर, राम्या कृष्णन, जगपति बाबू, जरीना वहाब और अन्य
निर्देशक: गोपीचंद मलिनेनी
निर्माता: नवीन येरनेनी, यलंमचिली रवि शंकर, टी.जी. विश्व प्रसाद, उमेश कुमार बंसल
स्टूडियोज: मैत्री मूवी मेकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री, ज़ी स्टूडियोज
‘गदर 2’ के बाद सनी देओल की वापसी को लेकर दर्शकों की उम्मीदें आसमान पर थीं, और बैसाखी पर रिलीज़ हुई ‘जाट’ उनके प्रशंसकों के लिए किसी त्योहार से कम भी नहीं। फिल्म में सनी देओल अपने चिर-परिचित ढाई किलो के हाथ के अंदाज़ में लौटे हैं, लेकिन अफसोस कि इस बार उनके हाथ में दम है, कहानी में नहीं।
फिल्म एक ऐसे अधिकारी की कहानी कहती है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए सिस्टम से बाहर आकर अपना कानून खुद बनाता है। यह प्लॉट दर्शकों को शाहरुख खान की ‘जवान’ की याद दिला सकता है, लेकिन वहां की गहराई व स्टाइल यहां नदारद है।
कहानी का कमजोर सिरा
निर्देशक गोपीचंद मलिनेनी की यह फिल्म एक पुराने दौर की स्क्रिप्ट जैसी लगती है। कहानी में लॉजिक की कमी है और कई बार घटनाएं दर्शकों की समझ से परे लगती हैं। फिल्म में आंध्र प्रदेश के एक काल्पनिक आतंकी ‘राणातुंगा’ को लेकर जो कहानी रची गई है, वह न तो आज के भारत से मेल खाती है, न ही दर्शकों की सोच से।
‘सॉरी बोल’ नामक एक लंबा खिंचा हुआ ट्रैक, इडली गिराने से लेकर ट्रेन में मारधाड़ तक पहुंचता है, लेकिन मुख्य कथानक तक पहुंचने में फिल्म आधा वक्त ही निकाल देती है।
एक्शन बहुत, असर कम
फिल्म के एक्शन सीन दमदार हैं, लेकिन उनका ओवरडोज़ फिल्म की रफ्तार को भी धीमा करता है। स्लो मोशन में सनी देओल को बार-बार देखना कभी-कभी थका देता है। फिल्म में 4 एक्शन डायरेक्टरों की मेहनत साफ नजर आती है, पर कहानी के कमजोर जोड़ के कारण वह असर छोड़ने में नाकाम भी रहती है।
कलाकारों का प्रदर्शन
रेजिना कसांड्रा ने एक प्रभावशाली भूमिका निभाई है, लेकिन उनका किरदार अंततः लेखन की भेंट चढ़ जाता है। रणदीप हुड्डा की खलनायकी में क्रूरता है, लेकिन उसकी गहराई नहीं। विनीत कुमार सिंह, संयमी खेर और अन्य सहकलाकार फिल्म में प्रभाव नहीं छोड़ पाते। उर्वशी रौतेला का आइटम सॉन्ग फिल्म के टोन से मेल नहीं खाता और ‘ए-लिस्टर’ फिल्म को बी-ग्रेड लुक भी दे देता है।
बिजनेस और ब्रांडिंग
‘पुष्पा’ बनाने वाले प्रोडक्शन हाउस की उम्मीदें भले इस फिल्म से जुड़ी हों, लेकिन कमजोर कहानी ने इसकी ब्रांडिंग को नुकसान पहुंचाया है। ओटीटी और सैटेलाइट राइट्स बिक चुके हैं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की सफलता संदिग्ध ही है।
‘जाट’ पूरी तरह से सनी देओल की फैन बेस को ध्यान में रखकर बनाई गई एक्शन फिल्म है। लेकिन केवल एक्शन और स्टार पॉवर से कहानी को बचाया नहीं जा सकता। एक मजबूत पटकथा, तर्कसंगत संवाद और बेहतर निर्देशन की कमी इस फिल्म को औसत भी बनाती है। यह फिल्म ‘जवान’ या ‘पुष्पा’ जैसी मेगा हिट्स की कतार में खड़ी होने के बजाय उनकी परछाई बनकर ही रह जाती है।
देखें या छोड़ें?
सिर्फ सनी देओल के फैन हैं या ढाई किलो के घूंसे देखने के लिए थिएटर जाना पसंद है, तो एक बार देख सकते हैं। बाकियों के लिए ओटीटी पर आने का इंतज़ार करना ही बेहतर होगा।
