BC Khanduri was a disciplined and punctual leader.
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि अनुशासन व समय की पाबंदी के प्रतीक भी माने जाते थे। उनके निधन पर नेताओं व करीबी सहयोगियों ने उनसे जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति में भी सैन्य अनुशासन की मिसाल भी कायम की।
भारतीय सेना में मेजर जनरल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए बीसी खंडूड़ी का जीवन पूरी तरह अनुशासित भी रहा। वे जहां जिस समय पहुंचने का वादा करते थे, वहां ठीक उसी समय उपस्थित भी होते थे। उनके लिए समय की पाबंदी केवल आदत नहीं बल्कि कार्यशैली का अहम हिस्सा भी थी। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की देरी पर वह नाराजगी जताने से नहीं चूकते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सेना का अनुशासन उन्होंने अपने पूरे व्यक्तित्व में उतार भी लिया था। कैबिनेट बैठकों में अधिकारी यदि बिना मंत्रियों को पढ़ाए नोट सीधे उनके पास ले आते थे तो वह उन्हें फटकार भी लगाते थे। उन्होंने कहा कि लोग अपनी घड़ी का समय बीसी खंडूड़ी के अनुसार मिलाते थे क्योंकि वह हमेशा तय समय पर ही पहुंचते थे।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमन्त द्विवेदी ने बताया कि बीसी खंडूड़ी सादगी, ईमानदारी व कड़े अनुशासन की मिसाल थे। एक चुनावी बैठक में हल्द्वानी में कार्यकर्ता समय पर नहीं पहुंचे तो उन्होंने कार्यक्रम तय समय पर शुरू भी कराया, मौजूद लोगों को संबोधित किया व निर्धारित समय पर ही रवाना हो गए।
वहीं तत्कालीन कोऑपरेटिव सोसायटी अध्यक्ष उमेश त्रिपाठी ने बताया कि 1991 में बैजरो में उनकी गाड़ी खराब भी हो गई थी, लेकिन समय पर जनसभा में पहुंचने के लिए उन्होंने रोडवेज बस से सफर भी किया। वह फिजूलखर्ची के खिलाफ थे व अक्सर ट्रेन से यात्रा करना पसंद भी करते थे।
