पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व सीएम व वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ भी चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में ही शोक की लहर दौड़ गई। बीते कई दिनों से उनके आवास पर नेताओं, शुभचिंतकों व परिजनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था।

उत्तराखंड के चौथे सीएम रहे खंडूड़ी को राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लेकर आए थे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा व जल्द ही भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल भी हो गए। वाजपेयी के बेहद करीबी व भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती भी होती थी।

पहली बार लोकसभा पहुंचने के 2 साल के भीतर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया। हालांकि 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। उनके कार्यकाल में देशभर में सड़कों व राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण को नई गति मिली। हाईवे विकास व बेहतर सड़क नेटवर्क के लिए आज भी उनकी प्रशंसा की जाती है।

वर्ष 2007 में बीजेपी ने उत्तराखंड की कमान खंडूड़ी को सौंपी। उस समय पार्टी गुटबाजी से जूझ रही थी और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल भी था। खंडूड़ी ने 2007 से 2009 तक सीएम पद संभाला। बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें हटाकर रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम बनाया।

इसके बाद राज्य में भ्रष्टाचार के कई मामलों के सामने आने पर बीजेपी नेतृत्व ने एक बार फिर खंडूड़ी पर भरोसा जताया व 2011 में उन्हें दोबारा सीएम बनाया गया। उनके कार्यकाल को सादगी, ईमानदार छवि व प्रशासनिक सख्ती के लिए याद किया जाता है।

वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया। उनके निधन से उत्तराखंड व भारतीय राजनीति ने एक सादगीपूर्ण व अनुशासित नेता को खो दिया है।