Those who do not cooperate in the census in Uttarakhand will be booked for FIR, the Directorate is strict
उत्तराखंड में चल रही जनगणना के पहले चरण में प्रगणकों को लोगों व कई सरकारी विभागों के असहयोग का सामना भी करना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीर मानते हुए जनगणना निदेशालय उत्तराखंड ने सख्त रुख अपनाया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि जो लोग जनगणना टीम को जानकारी देने से इनकार करेंगे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रदेश में 25 अप्रैल से घर-घर भवन गणना अभियान भी शुरू हुआ था। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि अब तक केवल 67 प्रतिशत कार्य ही पूरा भी हो पाया है, जबकि अभियान समाप्त होने में सिर्फ 6 दिन शेष हैं।
प्रगणकों का कहना है कि कई लोग घरों में प्रवेश नहीं दे रहे व जनगणना के 33 सवालों का जवाब देने से भी बच रहे हैं। इसे देखते हुए निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं।
वहीं कई सरकारी विभागों पर भी सहयोग न करने के आरोप भी लगे हैं। बताया जा रहा है कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है, उन्हें विभागीय अधिकारी समय पर कार्यमुक्त ही नहीं कर रहे। कुछ विभागों ने तो जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की आकस्मिक अवकाश (सीएल) तक भी लगा दी। इस मामले में भी जनगणना निदेशालय ने संबंधित विभागों को पत्र भेजकर नाराजगी भी जताई है।
इधर राजधानी देहरादून में महिला प्रगणक पर खूंखार कुत्ते के हमले के मामले को निदेशालय ने गंभीरता से भी लिया है। निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने नगर निगम की प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर नमामि बंसल से बात कर मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रगणकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता भी है।
जनगणना टीमों को पूर्व सैनिकों के कुछ इलाकों में भी परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर टीमों को घरों में प्रवेश ही नहीं दिया जा रहा, जिससे अभियान प्रभावित हो रहा है। जनगणना निदेशालय ने सभी नागरिकों से देशहित में सहयोग करने की अपील भी की है।
