त्रियुगीनारायण मंदिर बना देश का चर्चित आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन

त्रियुगीनारायण मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि देशभर के नवयुगलों के लिए एक लोकप्रिय आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन भी बन चुका है। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह हुआ था और भगवान विष्णु स्वयं इस दिव्य विवाह के साक्षी भी बने थे।

हिमालय की खूबसूरत वादियों के बीच बसे इस मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं व नवविवाहित जोड़ों की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर में जल रही अखंड “धनंजय अग्नि” को विवाह की साक्षी मानकर नवयुगल सात फेरे भी लेते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र अग्नि के समक्ष विवाह करने वाले दंपतियों को भगवान शिव व माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

राजेश भट्ट ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश व बंगाल सहित देशभर से नवयुगल यहां विवाह करने पहुंच भी रहे हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक यहां करीब 100 शादियां सम्पन्न भी हो चुकी हैं, जबकि बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से लगभग 40 जोड़े विवाह बंधन में भी बंध चुके हैं।

आध्यात्मिक वातावरण, प्राचीन कुंड, अखंड अग्नि और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण त्रियुगीनारायण मंदिर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धार्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान भी बना रहा है।