उत्तराखंड में बिजली संकट से निपटने की तैयारी, अगले 10 वर्षों की जरूरतों का बनेगा रोडमैप

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने व अघोषित कटौती से बचने के लिए बड़ी तैयारी भी शुरू कर दी है। आयोग ने “रिसोर्स एडिक्वेसी फ्रेमवर्क नियमावली-2026” का मसौदा जारी भी किया है, जिसके तहत अगले 10 वर्षों की बिजली मांग व आपूर्ति का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। मसौदे पर 12 जून तक सुझाव भी मांगे गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत बिजली वितरण कंपनियों को अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी करना होगा। भविष्य में बिजली की मांग का अनुमान लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों की मदद ली जाएगी। इसके साथ मौसम, जनसंख्या वृद्धि व आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा।

आयोग ने गर्मियों और त्योहारों के दौरान अचानक बढ़ने वाली बिजली मांग को ध्यान में रखते हुए “प्लानिंग रिजर्व मार्जिन” यानी पीआरएम का प्रावधान किया है। इसके तहत उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को अनुमानित अधिकतम मांग से अधिक बिजली की अग्रिम व्यवस्था भी रखनी होगी।

नियमावली में बिजली खरीद को लेकर भी सख्त मानक भी तय किए गए हैं। यूपीसीएल को अपनी कुल जरूरत का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से सुनिश्चित करना होगा, ताकि बाजार में बिजली की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं पर भी कम पड़े।

इसके अलावा पनबिजली, सौर ऊर्जा व अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच बेहतर संतुलन बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है।