273 sub-inspector recruitment scam High Court dismisses Rakesh Mittal's petition
नैनीताल उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड के पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक राकेश मित्तल की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज भी कर दी है। याचिका में उन्होंने 2 अन्य व्यक्तियों को आरोपी के रूप में समन किए जाने की मांग भी की थी।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि विशेष न्यायाधीश सीबीआई (भ्रष्टाचार निवारण) देहरादून द्वारा 30 जनवरी 2025 को दिए गए आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता ही नहीं है और निचली अदालत का फैसला कानून के अनुरूप भी है।
मामला वर्ष 2001 में 273 पुलिस उपनिरीक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से भी जुड़ा है। उस समय राकेश मित्तल चयन समिति के अध्यक्ष भी थे। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच व चार्जशीट में उन पर अंकों में हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए थे।
मित्तल ने अदालत में दावा किया था कि उनके खिलाफ साजिश रची गई ताकि उन्हें डीजीपी बनने से रोका भी जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन पुलिस अधिकारी एबी लाल व जीसी पंत ओएमआर शीट मूल्यांकन के दौरान अनधिकृत रूप से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की में मौजूद थे व अंकों से छेड़छाड़ की गई।
वहीं सीबीआई ने अदालत को बताया कि एफएसएल जांच में फ्लॉपी का डेटा सबसे पहले मित्तल के लैपटॉप में कॉपी होना भी पाया गया। जांच में उनके लैपटॉप में मूल व परिवर्तित दोनों प्रकार के अंक भी मिले थे।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धारा 319 के तहत किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी बनाने के लिए मजबूत व स्पष्ट साक्ष्य जरूरी होते हैं। अदालत ने माना कि मित्तल के आरोप रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों व गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। इसके साथ ही कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका को पूरी तरह खारिज भी कर दिया।
