Uttarakhand Commission takes a tough stance on child safety — 'Fit Institution' centers to be set up in every district; 82 children remain missing after three years.
देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने का निर्णय भी लिया है। आयोग अब हर जिले में 2 से 4 ऐसी संस्थाओं और आवासों की पहचान भी करेगा, जहां रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित माहौल में भी रखा जा सके। इन्हें ‘फिट संस्था’ घोषित भी किया जाएगा। इसके साथ ही नशे की चपेट में आए बच्चों के उपचार के लिए हर जिला अस्पताल में 2 बेड आरक्षित भी किए जाएंगे।
राज्य स्तरीय समन्वय बैठक में उठे गंभीर मुद्दे
बाल अधिकार आयोग ने बृहस्पतिवार को आयोग कार्यालय में एक राज्य स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित भी की। इसमें बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी, बाल तस्करी, यौन शोषण, बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम व किशोर अपराध जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन चर्चा की गई। आयोग ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की जरूरत पर भी बल दिया।
3 साल में 82 बच्चे घर नहीं लौटे, 40 आपराधिक गतिविधियों के शिकार
आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने बताया कि एनसीआरबी की रिपोर्ट में बच्चों से जुड़े अपराध के मामले बड़ी संख्या में सामने भी आते हैं। हालांकि अधिकांश लापता बच्चे उसी दिन या अगले दिन परिवार के पास भी लौट आते हैं, लेकिन पिछले 3 वर्षों में 82 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं जिनमें बच्चे अब तक घर ही नहीं लौटे। इनमें से 40 बच्चों की गुमशुदगी आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ी पाई गई है।
आयोग ने पुलिस विभाग से पिछले 3 वर्षों में लापता सभी बच्चों की स्थिति पर व्यापक रिपोर्ट भी तलब की है।
त्वरित कार्रवाई और निगरानी तंत्र होगा मजबूत
अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों को हर परिस्थिति में सुरक्षित व विकास के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है। बैठक में बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी निगरानी व विभागों के बीच सूचना आदान-प्रदान को और अधिक सुदृढ़ करने पर विशेष जोर भी दिया गया।
