हिमाचल के जंगल में पहली बार बाघ की पुष्टि, उत्तराखंड से पहुंचने की संभावना

हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब वन प्रभाग के जंगल में पहली बार बाघ की वैज्ञानिक पुष्टि भी हुई है। कैमरा ट्रैप में बाघ की तस्वीर मिलने के बाद वन विभाग ने इसकी पुष्टि भी की है। माना जा रहा है कि यह बाघ उत्तराखंड के जंगलों से हिमाचल में पहुंचा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके में पिछले डेढ़ साल से बाघ की मौजूदगी भी देखी जा रही थी, लेकिन अब पहली बार वैज्ञानिक प्रमाण सामने भी आए हैं। वन अधिकारियों को क्षेत्र के पेड़ों पर बाघ द्वारा टेरिटरी मार्किंग के लिए किए जाने वाले खरोंच के निशान मिले हैं।

पांवटा साहिब वन मंडल के एसीएफ आदित्य शर्मा ने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है व स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से भी लगातार संपर्क भी किया जा रहा है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे ने बताया कि यदि बाघ की व स्पष्ट तस्वीरें मिलती हैं तो उनका मिलान रिजर्व के डेटाबेस से किया जाएगा, जिससे यह भी पता लगाया जा सके कि बाघ राजाजी क्षेत्र से आया है या किसी अन्य स्थान से।

हिमाचल वन विभाग की सहायता के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम भी क्षेत्र का दौरा भी करेगी। जरूरत पड़ने पर कैमरा ट्रैप व तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।