भूसे की बढ़ती कीमतों पर सरकार सख्त, भंडारण और राज्य से बाहर परिवहन पर 15 दिन की रोक

देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं के लिए उपयोग होने वाले भूसे की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम भी उठाए हैं। पशुपालन विभाग ने भूसे के अनावश्यक भंडारण, कालाबाजारी व राज्य से बाहर परिवहन पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए हैं।

पशुपालन विभाग के अपर सचिव संतोष बडोनी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के पशुपालक मुख्य रूप से गेहूं के भूसे को सूखे चारे के रूप में उपयोग भी करते हैं। हाल के दिनों में भूसे की कीमतों में भारी उछाल के कारण पशुपालकों को पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध ही नहीं हो पा रहा है, जिससे परेशानी भी बढ़ गई है।

आदेश के अनुसार, भूसे का अनावश्यक भंडारण व कालाबाजारी रोकने के लिए जिलों में विशेष निगरानी भी रखी जाएगी। साथ ही आगामी 15 दिनों तक भूसे की बिक्री ईंट भट्टों व अन्य औद्योगिक इकाइयों को नहीं की जाएगी। इसके अलावा, जिलों में उत्पादित भूसे को राज्य से बाहर भेजने पर भी तत्काल प्रभाव से रोक भी लगा दी गई है।

सरकार का मानना है कि भूसे की कमी की स्थिति में पशुपालक बड़ी संख्या में पशुओं को छोड़ सकते हैं, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ने के साथ कृषि फसलों को नुकसान, सड़क दुर्घटनाएं व कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां पैदा भी हो सकती हैं।

अपर सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित भी किया जाए। साथ ही जिलों में पराली (पुराल) जलाने पर भी रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी बनी रहे।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के पशुपालकों व गौशालाओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।