इन कारणों से विवाह होगा शून्य… पत्नी भी इन आधारों पर ले सकेगी तलाक; जानें महत्वपूर्ण प्रावधान
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने स्वतंत्रता के बाद समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू किया है। पीएम नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले इस महत्वपूर्ण कानून की औपचारिक घोषणा की गई है। यह कानून पूरे राज्य में लागू होगा और राज्य के बाहर रहने वाले उत्तराखंड के नागरिकों पर भी प्रभावी होगा।
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक कानून को लाने में नेतृत्व किया। इस अवसर पर यूसीसी पोर्टल का अनावरण किया गया, जो इस कानून के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो धर्म, लिंग, जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव को समाप्त करेगा और समाज को समान आधार पर जोड़ने का कार्य करेगा।
समान नागरिक संहिता के तहत, अब पत्नी को भी पति के समान अधिकार प्राप्त होंगे। यदि वह चाहेगी, तो वह पति से तलाक ले सकेगी। तलाक के कारणों में पति की एक से अधिक पत्नियां, दुष्कर्म का दोष, क्रूरता, किसी अन्य के साथ संभोग, या दो वर्ष तक पति-पत्नी के बीच शारीरिक दूरी शामिल हो सकते हैं।
आपसी सहमति से तलाक पति-पत्नी मिलकर यह याचिका प्रस्तुत कर सकेंगे कि वे एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग-अलग रह रहे हैं और वे इस बात पर सहमत हैं कि विवाह का विघटन किया जाए। इस याचिका पर छह महीने के बाद, यदि कोई पक्ष याचिका वापस नहीं लेता है, तो न्यायालय तलाक का आदेश जारी कर देगा।
पत्नी के लिए तलाक के आधार यदि पति विवाह के बाद दुष्कर्म या किसी अन्य अप्राकृतिक संभोग का दोषी हो, या यदि पति के पास एक से अधिक पत्नियां हों, तो पत्नी तलाक के लिए याचिका दायर कर सकती है।
इन कारणों से विवाह हो जाएगा शून्य
- नपुंसकता या जानबूझकर विवाहेतर संभोग न करना।
- याचिकाकर्ता की सहमति बलपूर्वक या धोखाधड़ी से ली गई हो।
- पत्नी विवाह के समय किसी अन्य पुरुष से गर्भवती हो, या पति ने विवाह के समय किसी अन्य महिला को गर्भवती किया हो।
- पति या पत्नी ने धर्म परिवर्तन किया हो।
- मानसिक विकार से पीड़ित होना।
- असाध्य संचारी यौन रोग से पीड़ित होना।
- भरण पोषण के आदेश का पालन करने में असमर्थ होना।
शादी के एक साल तक तलाक नहीं यूसीसी के तहत विवाह के एक वर्ष के भीतर तलाक की याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी। न्यायालय विशेष कारणों पर ही तलाक की अनुमति दे सकेगा और यदि तथ्य छिपाकर याचिका दायर की गई हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है। तलाक की याचिका के समय न्यायालय बच्चों के हित और कल्याण को भी ध्यान में रखेगा।
प्रथा, रूढ़ि, परंपरा के तहत तलाक मान्य नहीं यूसीसी के तहत किसी भी प्रथा, रूढ़ि या परंपरा के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। यह कानून पुराने और नए विवाहों पर लागू होगा।
कानून में सजा
- विवाह के लिए निर्धारित आयु का पालन न करने, प्रतिबंधित रिश्तों में विवाह करने पर छह महीने की जेल, 50 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- किसी प्रथा, रूढ़ि या परंपरा के तहत तलाक देने पर तीन साल की जेल और जुर्माना होगा।
- पूर्व पत्नी के साथ पुनर्विवाह करने पर तीन साल की जेल, एक लाख रुपये जुर्माना, और सजा छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है।
विवाह पंजीकरण और अन्य प्रावधान
- विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, न करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है।
- न्यायिक आदेश से ही तलाक मान्य होगा, अन्यथा विवाह विच्छेदन मान्य नहीं होगा।
- विवाह पंजीकरण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक होगा।
इस प्रकार, यूसीसी ने उत्तराखंड में एक ऐतिहासिक कदम भी उठाया है, जो समाज को समान अधिकारों व न्याय की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेगा।