Demand to hike solar tariffs citing low sunlight in the mountains rejected.
उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में कम धूप मिलने का हवाला देकर सोलर बिजली का टैरिफ बढ़ाने की मांग को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने खारिज कर दिया है। आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी ने सोलर प्लांट के क्षमता उपयोग कारक यानी CUF को 19 फीसदी से घटाकर 17 फीसदी करने की मांग की थी, ताकि इसके आधार पर सोलर बिजली के बेंचमार्क टैरिफ में बढ़ोतरी की जा सके।
सोसाइटी का तर्क था कि उत्तराखंड का पहाड़ी भूगोल जटिल और उबड़-खाबड़ है। पहाड़ों और ढलानों की वजह से सुबह और शाम की धूप सोलर प्लांट तक नहीं पहुंच पाती। साथ ही, पहाड़ी इलाकों में सोलर पैनलों को पूरी तरह दक्षिण दिशा में रखना भी तकनीकी रूप से मुश्किल है। सोसाइटी के मुताबिक नए मोनो-क्रिस्टलाइन प्लांट्स का औसत CUF करीब 15 से 17 फीसदी ही रह रहा है।
सोसाइटी का कहना था कि 19 फीसदी CUF मानकर सरकार सोलर बिजली की दर करीब 4.10 रुपये प्रति यूनिट तय करती है, जिससे डेवलपर्स अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे और प्रोजेक्ट घाटे में जा रहे हैं।
हालांकि, यूपीसीएल और उरेडा ने इस मांग का विरोध किया। यूपीसीएल ने कहा कि CUF कम करने से सोलर बिजली की दरें बढ़ेंगी और इसका आर्थिक भार आखिरकार बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। वहीं, उरेडा और यूपीसीएल के मुताबिक अब मोनो-पर्क और बाइफेशियल जैसे आधुनिक पैनल पहले के मुकाबले ज्यादा दक्ष हैं और राज्य के कई प्लांट विषम परिस्थितियों के बावजूद 19 फीसदी या उससे अधिक CUF हासिल कर रहे हैं।
यूपीसीएल ने यह भी तर्क दिया कि पांच साल के कंट्रोल पीरियड के बीच नियम बदलने से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नियामक स्थिरता प्रभावित होगी।
मामले की सुनवाई के बाद आयोग की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों में छूट का इस्तेमाल किसी विशिष्ट मामले की व्यक्तिगत परेशानी दूर करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इससे पूरे राज्य पर लागू सामान्य नियम नहीं बदले जा सकते।
आयोग ने कहा कि CUF एक सामान्य तकनीकी मानक है। इसमें बदलाव के लिए आयोग को अपनी विधायी शक्तियों के तहत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां व सुझाव लेने की प्रक्रिया अपनानी होगी।
