सावधान: Ghibli इमेज से फोटो बनाना पड़ सकता है महंगा, फेशियल डाटा का साइबर क्राइम में हो सकता है दुरुपयोग

सोशल मीडिया पर गिबली क्रेज: एआई-जनरेटेड आर्ट के खतरों से सतर्क रहें साइबर एक्सपर्ट्स

फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर इस समय ‘गिबली’ बनाने का क्रेज चल रहा है। लोग अपनी तस्वीरें इस स्टाइल में बदल रहे हैं, जिसे कुछ लोग ‘गिबली’, ‘गिवली’ और ‘जिवली’ के नाम से भी पुकार रहे हैं। हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस ट्रेंड के बीच लोगों को निजता के खतरों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं।

साइबर सीओ सुमित पांडे का कहना है कि इस तरह के एआई-जनरेटेड आर्ट्स के आकर्षण के बीच हमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया, “स्टूडियो गिबली स्टाइल की इमेजेस भले ही मजेदार और आकर्षक लग रही हों, लेकिन जब हम अपनी फोटो इन प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करते हैं, तो हम अनजाने में अपनी ताजा फेशियल डाटा ओपन एआई को उपलब्ध भी कराते हैं।”

पांडे ने बताया कि वेब स्क्रैप्ड डाटा कानूनी और नियमों के तहत सुरक्षित होता है, लेकिन जब हम अपनी खुद की फोटो साझा करते हैं, तो यह एक बड़ा जोखिम भी बन सकता है। यह किसी को नहीं पता कि इन फोटोज का डेटा कहां सुरक्षित रखा जा रहा है और भविष्य में एआई के जरिए इस डेटा का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है।

इसके साथ ही, साइबर सीओ ने चेतावनी दी है कि चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म्स और ग्रोक द्वारा दिए जा रहे जवाबों के साथ भी लोगों को सतर्क रहना भी चाहिए, क्योंकि इससे संवेदनशील और भ्रामक जानकारी का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, “लोगों को अपनी फोटो का गलत इस्तेमाल होने से बचने के लिए एआई-जनरेटेड आर्ट्स से दूर भी रहना चाहिए।”

नैनीताल पुलिस की डिजिटल अरेस्ट को लेकर चेतावनी

वहीं, नैनीताल पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के बारे में लोगों को जागरूक किया है। पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि पुलिस कभी भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। यदि कोई कॉलर इस शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, तो इसे तुरंत संदिग्ध समझें और कॉल करने वाले के झांसे में न आएं। इसके साथ ही पुलिस ने इस तरह की घटनाओं की सूचना डायल 1930 पर देने की अपील की है।

गिबली (Studio Ghibli) क्या है?

स्टूडियो गिबली जापान का एक प्रसिद्ध एनिमेशन स्टूडियो है, जिसे 1985 में हायाओ मियाजाकी और इसाओ ताकाहाता ने स्थापित भी किया था। इसकी विशेषता इसके हाथ से बनाए गए एनिमेशन हैं, जो दुनियाभर में लोकप्रिय हैं। आजकल, लोग स्टूडियो गिबली के नाम को ‘गिबली’, ‘गिवली’ या ‘जिवली’ कहकर इस्तेमाल भी कर रहे हैं, जबकि असल नाम ‘गिबली’ है।

जागरूकता की आवश्यकता

प्रह्लाद नारायण मीणा, एसएसपी ने लोगों से अपील की है कि वे इस एआई-जनरेटेड आर्ट के क्रेज से सतर्क रहें और अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा भी पर ध्यान दें।