Another case of ragging at Doon Medical College; junior PG doctor recounts six months of mental anguish.
दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आया है। रैगिंग से परेशान एक जूनियर पीजी डॉक्टर ने भावुक होकर अपनी आपबीती सुनाई। डॉक्टर का कहना है कि वह पिछले छह महीने से मानसिक तनाव झेल रहा है और अब पढ़ाई करने का भी मन नहीं करता।
साढ़े पांच साल का एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के बाद डॉक्टर ने फरवरी में पीजी के लिए दून मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। उनका कहना है कि शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन मार्च से सीनियर डॉक्टर अलग-अलग बातों को लेकर उन्हें नीचा दिखाने लगे। कई बार एमबीबीएस छात्रों के सामने भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
पीड़ित डॉक्टर के मुताबिक, उन्होंने एनाटॉमी विभागाध्यक्ष से इसकी शिकायत भी की, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। शिकायत के बाद भी कथित तौर पर उन्हें बार-बार परेशान किया जाता रहा। डॉक्टर ने परिवार को भी पूरी घटना की जानकारी दी है, जिसके बाद उनकी मां भी मानसिक रूप से परेशान हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप पीजी के सीनियर डॉक्टरों पर लगे हैं, जिन पर जूनियर छात्रों को पढ़ाने और क्लीनिकल कार्यों में मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सीनियर डॉक्टरों पर ही रैगिंग के आरोप लगना कॉलेज की व्यवस्था और छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।
दून मेडिकल कॉलेज में पहले भी सामने आ चुके हैं रैगिंग के मामले
2019: रैगिंग की शिकायत के बाद कॉलेज ने छह छात्रों पर कार्रवाई की थी।
2021: एक जूनियर छात्र ने सीनियरों पर उसे गर्दन झुकाकर चलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था।
2023: जूनियर छात्र की पिटाई के मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ छात्रों पर कार्रवाई हुई थी।
जनवरी 2026: जूनियर को बेल्ट और चप्पलों से पीटने और जबरन बाल कटवाने के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद कई छात्रों पर कार्रवाई की गई।
अप्रैल 2026: सीनियर छात्रों पर जूनियर की दाढ़ी और बाल कटवाने का दबाव बनाने के आरोप लगे थे। इस मामले में भी कॉलेज ने कार्रवाई की थी।
