A series of accidents continues on the Asharodi-Mohabbewala slope; five accidents in 25 days.
देहरादून में आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच ढलान पर हादसों को रोकने के लिए किए जा रहे विभागीय प्रयास अब तक कारगर साबित नहीं हुए हैं। हर हादसे के बाद एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके का निरीक्षण करते हैं और नए सुझाव देते हैं। इसके बाद कुछ उपाय भी किए जाते हैं, लेकिन हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। हालात यह हैं कि बीते 25 दिनों में यहां पांच हादसे हो चुके हैं। यानी औसतन हर पांचवें दिन एक दुर्घटना हो रही है।
दरअसल, मोहब्बेवाला का यह ढलान पहले से मौजूद है और यहां पहले भी हादसे होते रहे हैं। लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद ढलान और तीव्र हो गया। ऊंचा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनने के बाद शहर में प्रवेश करते ही यह हिस्सा और खतरनाक हो गया। यहां हादसों का सिलसिला नवंबर 2024 में शुरू हुआ, जब एक्सप्रेसवे के इस कॉरिडोर से वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। 14 नवंबर 2024 को एक कंटेनर पलट गया था, जिसके नीचे दबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। उस समय प्रशासन ने निरीक्षण के बाद रोशनी की कमी को हादसे की वजह बताया और यहां फ्लड लाइट लगाई गईं। हालांकि, इसके बाद भी दुर्घटनाएं नहीं रुकीं। कभी ईंटों से भरा ट्रक पलटा तो कभी टाइलों से लदा ट्रक दीवार में जा घुसा।
एक्सप्रेसवे के औपचारिक उद्घाटन के बाद हादसों का सिलसिला और तेज हो गया। अप्रैल में उद्घाटन के अगले ही दिन पेंट से लदा एक ट्रक अनियंत्रित हो गया। ट्रक ने कई पेड़ों को तोड़ दिया और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद अधिकारियों ने फिर निरीक्षण किया और वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स लगाने का सुझाव दिया। कुछ दूरी पर ये पट्टियां लगाई गईं। इसके बाद करीब तीन महीने तक कोई हादसा सामने नहीं आया, लेकिन 20 सितंबर से दुर्घटनाओं का दौर दोबारा शुरू हो गया, जो अब तक जारी है।
इस दौरान एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, प्रशासन और पुलिस के कई अधिकारी मौके का दौरा कर चुके हैं। उनके सुझावों के आधार पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र के बोर्ड, गति सीमा के संकेत, बैरियर और गति अवरोधक लगाए गए। इसके बावजूद हादसों पर लगाम नहीं लग पाई। बृहस्पतिवार को हुए हादसे में एक और व्यक्ति की जान चली गई। लगातार निरीक्षण और योजनाओं के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
पांच अक्टूबर को हुए हादसे के बाद आरटीओ, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों ने एक बार फिर मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान बताया गया कि एनएचएआई ने हादसों के कारणों की पड़ताल के लिए सीआरआरआई को भी लगाया है। वहीं, परिवहन विभाग की टीम जेपीआरआई की टीम को लेकर मौके पर पहुंची थी। दोनों टीमें दुर्घटनाओं के कारणों की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई की टीम एक-दो दिनों में विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।
अब तक किए गए उपाय
हादसों को रोकने और सड़क पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब तक कई उपाय किए गए हैं। क्षेत्र में गति सीमा और चेतावनी की जानकारी देने के लिए कुल 58 ट्रैफिक साइन बोर्ड लगाए गए हैं। वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए 485 मीटर क्षेत्र में रंबल स्ट्रिप्स बनाई गई हैं। सड़क के बीच स्पष्ट विभाजन और रात में सही दिशा पहचानने के लिए 1,880 मीटर मीडियन मार्कर लगाए गए हैं। इसके अलावा, रात में दृश्यता बेहतर करने के लिए 500 मीटर क्षेत्र में सोलर स्टड्स भी स्थापित किए गए हैं।
इन तमाम इंतजामों के बावजूद मोहब्बेवाला ढलान पर हादसों का जारी रहना विभागीय योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें जांच टीमों की रिपोर्ट और हादसों को रोकने के लिए किए जाने वाले ठोस उपायों पर टिकी हैं।
