Badrinath Temple offering misappropriation case Investigation team scrutinizing 40 days of CCTV footage.
बदरीनाथ मंदिर में दान व चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के मामले की जांच अब 40 दिन की सीसीटीवी फुटेज तक भी पहुंच गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 2 जुलाई को सामने आई घटना पहली बार हुई थी या इससे पहले भी चढ़ावे की गणना के दौरान इसी तरह की अनियमितता भी होती रही है।
बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि चढ़ावे की गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की 40 दिन की फुटेज सुरक्षित भी रखी गई है। जांच टीम सभी रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच भी कर रही है। यदि किसी अन्य दिन भी गड़बड़ी के सबूत मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
जांच का फोकस इस बात पर भी है कि आरोपी कर्मचारी ने कथित हेराफेरी अकेले की या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। सूत्रों के मुताबिक, एक सीसीटीवी फुटेज में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए भी दिखाई दिया है, जिसकी जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी को वर्ष 2026 में पहली बार बदरीनाथ मंदिर में तैनात भी किया गया था। उसे दान-चढ़ावे की गणना व प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसी दौरान उस पर चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के आरोप भी लगे हैं।
मामले में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि 30 जून को दो वरिष्ठ अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह नई नियुक्ति क्यों ही नहीं की गई। ऐसे में 2 जुलाई को हुई दान गणना के दौरान आरोपी अधिकारी की भूमिका सबसे अहम भी मानी जा रही है।
बीकेटीसी के अनुसार, मंदिर में दान की गणना तय प्रक्रिया के तहत भी होती है। सोना-चांदी व नकदी की अलग-अलग गिनती की जाती है, बैंक कर्मियों की मौजूदगी में नकदी जमा कराई जाती है और हर वस्तु का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित भी रखा जाता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर जारी है।
