Unable to hear or speak, yet he built aircraft, tanks, and ropeways—the talent of Pithoragarh's Shamsher has become an inspiration.
पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड के एक छोटे से गांव राया गोल के रहने वाले 30 वर्षीय शमशेर सिंह अपनी असाधारण प्रतिभा से लोगों को हैरान भी कर रहे हैं। जन्म से मूक-बधिर होने के बावजूद शमशेर ने बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण के ऐसे मॉडल भी तैयार किए हैं, जिन्हें देखकर बड़े-बड़े इंजीनियर दंग भी रह जाते हैं।
बचपन से ही शमशेर को खिलौनों के अंदर की कार्यप्रणाली जानने की जिज्ञासा भी थी। दूसरे बच्चे जहां खिलौनों से खेलते थे, वहीं शमशेर उन्हें खोलकर यह समझने की कोशिश करते थे कि वे काम कैसे ही करते हैं। यही जिज्ञासा समय के साथ उनके हुनर की पहचान भी बन गई।
सीमित संसाधनों व शिक्षा के बावजूद शमशेर ने मोबाइल पर वीडियो देखकर तकनीक सीखनी भी शुरू की। उन्होंने किसी संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि खुद प्रयोग करते हुए बस, कार, ट्रक, डंपर व जेसीबी जैसे मॉडल तैयार किए। बाद में उन्होंने टैंक, रोपवे ट्रॉली, पानी में चलने वाले जहाज व तैरते हुए घर के मॉडल भी बना डाले।
उनके बनाए अधिकांश मॉडलों में लाइट, हॉर्न व इंडिकेटर भी काम करते हैं। शमशेर ने अपने घर के आसपास घुमावदार सड़कें बनाकर उन पर रिमोट से चलने वाले वाहनों का प्रदर्शन तैयार भी किया है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात की चुनौतियों को समझाया भी जा सके।
करीब 12 वर्ष पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई पर आ गई, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शमशेर ने अपने सपनों को ही नहीं छोड़ा। एक बार उनका बनाया विमान उड़ान के दौरान क्षतिग्रस्त भी हो गया था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नए प्रयोग भी जारी रखे।
सोशल मीडिया पर उनके वीडियो सामने आने के बाद अब उनके हुनर की सराहना भी हो रही है। शमशेर का सपना है कि वह भविष्य में व बड़े स्तर पर मॉडल तैयार करें और अन्य दिव्यांग युवाओं को भी यह कला भी सिखाएं। उनकी मां मोहिनी देवी का कहना है कि यदि शमशेर को उचित सहयोग व मंच मिले तो वह बहुत आगे तक जा सकते हैं।
शमशेर सिंह की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी शारीरिक बाधा की मोहताज भी नहीं होती, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
