NFHS-6 report Uttarakhand shows progress in maternal and child health and vaccination, breastfeeding figures remain a cause for concern
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट में उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं की मिश्रित लेकिन सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण व गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय सुधार भी दर्ज किया है। वहीं, शिशुओं को केवल मां का दूध पिलाने व जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने जैसे संकेतकों में गिरावट चिंता का विषय भी बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था के पहले 3 महीनों में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 68.8 से बढ़कर 80.6 भी हो गया है। वहीं, संस्थागत प्रसव 83.2 प्रतिशत से बढ़कर 88.9 प्रतिशत व कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव 83.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.3 प्रतिशत तक भी पहुंच गए हैं।
टीकाकरण के क्षेत्र में भी राज्य ने बेहतर प्रदर्शन भी किया है। 12 से 23 माह आयु वर्ग के पूर्ण टीकाकृत बच्चों का प्रतिशत 81.1 से बढ़कर 86 प्रतिशत भी हो गया है। रोटावायरस वैक्सीन की 3 खुराक पाने वाले बच्चों की संख्या 32.3 प्रतिशत से बढ़कर 92.8 प्रतिशत पहुंचना राज्य की बड़ी उपलब्धि भी माना जा रहा है।
बाल कुपोषण के मोर्चे पर भी सुधार भी दर्ज किया गया है। 5 वर्ष से कम आयु के अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) वाले बच्चों का प्रतिशत 27 से घटकर 20 प्रतिशत भी हो गया है। कम वजन व अत्यधिक दुबलापन वाले बच्चों की संख्या में भी कमी आई है।
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक संकेत सामने भी आए हैं। जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर 41.3 प्रतिशत से घटकर 37.1 प्रतिशत ही रह गई है। वहीं, 6 माह तक केवल मां का दूध पाने वाले बच्चों का प्रतिशत 52.5 से घटकर 40.8 प्रतिशत भी हो गया है, जो शिशु पोषण के क्षेत्र में चुनौती को भी दर्शाता है।
किशोर विवाह व किशोर मातृत्व के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है, जो सामाजिक जागरूकता व शिक्षा के बढ़ते स्तर का संकेत माना जा रहा है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण से जुड़े आंकड़ों में सुधार उत्साहजनक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं व पोषण कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन से और सकारात्मक परिणाम देखने को भी मिलेंगे।
