Panchayat elections may be delayed, Char Dham Yatra and reservation process become hurdles
देहरादून, (संवाददाता शुभम कोठारी ): उत्तराखंड में प्रस्तावित पंचायत चुनाव फिलहाल अधर में लटक सकते हैं। एक ओर चारधाम यात्रा की तैयारियों में प्रशासनिक अमला पूरी तरह व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी आरक्षण को लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया में देरी भी हो रही है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि जिला पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल एक बार फिर से बढ़ाया जा सकता है।
राज्य के 13 में से 12 जिलों में (हरिद्वार को छोड़कर) पंचायत चुनाव होने हैं। लेकिन चुनाव से पहले पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन कर ओबीसी आरक्षण लागू किया जाना भी जरूरी है। मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस विषय पर प्रस्ताव नहीं लाया गया, जिससे प्रक्रिया और भी पीछे खिसक गई है।
आरक्षण तय होने के बाद शुरू होगी अधिसूचना की प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पंचायत चुनाव के पहले एससी, एसटी, ओबीसी व महिला आरक्षण को लेकर शासनादेश जारी होगा। उसके बाद आरक्षण सूची का अनंतिम प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करना, और फिर उन पर सुनवाई कर निपटारा भी किया जाएगा। यह प्रक्रिया समय लेने वाली है, जिसके चलते अधिसूचना जारी होने में भी देर हो सकती है।
चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटा प्रशासन
इस बीच चारधाम यात्रा मई से शुरू हो रही है, जिसके लिए प्रशासन की पूरी मशीनरी तैनात हो जाएगी। ऐसे में एक जून को जिला पंचायतों के प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संभव ही नहीं दिख रहा।
हालांकि, पंचायती राज विभाग के सचिव चंद्रेश कुमार का कहना है कि विभाग पूरी तैयारी कर रहा है। “चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए 28 दिन की आवश्यकता होती है। यदि समय पर आरक्षण मिल गया, तो चुनाव तय समय पर कराए जा सकते हैं,” उन्होंने बताया।
वहीं, राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को अब तक आरक्षण सूची प्राप्त नहीं हुई है। “सरकार आरक्षण तय करेगी, उसके बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी,” उन्होंने कहा।
