Expenditure of municipal bodies is up to 114% of the income, revealed in Economic Survey Report
देहरादून : उत्तराखंड के 105 नगर निकाय अपनी आमदनी बढ़ाने की बजाय खर्च करने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस स्थिति के कारण कई नगर निकायों ने अपनी कुल प्राप्ति के मुकाबले 100 प्रतिशत से अधिक खर्च कर दिया है। खासकर, नैनीताल, चंपावत व उत्तरकाशी के नगर निकायों ने आय के सापेक्ष 100 प्रतिशत से अधिक खर्च कर दिया है, जिससे राज्य सरकार अब इन निकायों के खर्चों को नियंत्रित करने और कमाई बढ़ाने पर जोर देगी।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 में राज्य के नौ नगर निगम, 47 नगर पालिका और 49 नगर पंचायतों ने कुल 15 प्रतिशत अपनी आय स्वयं के स्रोतों से अर्जित की थी। 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 22.8 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस साल 30 प्रतिशत तक कमाई होने का अनुमान है।
हालांकि, खर्च के मामले में कुछ नगर निकायों की स्थिति चिंताजनक रही है। नैनीताल जिले के नगर निकायों ने आय के मुकाबले 115 प्रतिशत खर्च किया, वहीं चंपावत ने 103 और उत्तरकाशी ने 107 प्रतिशत तक खर्च किया। राज्य के नगर निकायों का औसत खर्च आय के मुकाबले 82 प्रतिशत तक है।
नगर निकायों की आय और खर्च:
| वर्ष | स्वयं कमाए (करोड़ रुपये) | राज्य-केंद्र से मिले (करोड़ रुपये) | कुल खर्च (करोड़ रुपये) |
|---|---|---|---|
| 2020-21 | 136.00 | 1317.85 | 738.02 |
| 2021-22 | 131.65 | 1115.93 | 1266.12 |
| 2022-23 | 167.17 | 1126.01 | 1101.92 |
| 2023-24 | 258.00 | 1410.92 | 1131.41 |
| 2024-25 | 280.00 | 1075.77 | 931.55 |
अब सरकार पर रहेगा कमाई बढ़ाने और खर्च घटाने का दबाव
राज्य सरकार नगर निकायों की कमाई बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है और इसके तहत कमाई को 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। वहीं, खर्च को घटाकर 1100 से 900 करोड़ रुपये के आसपास लाने की कोशिश की जा रही है। शहरी विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल स्वीकृत बजट की योजनाओं को ही अपनी बोर्ड बैठक से पास करें।
इसके अलावा, सरकार ने नगर निकायों की लीज की जमीनों, दुकानों व मकानों के लीज की अवधि बढ़ाने के लिए शासन की अनुमति अनिवार्य कर दी है, और यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ये संपत्तियां औने-पौने दामों पर नहीं दी जाएं।
इन कदमों से उम्मीद की जा रही है कि राज्य के नगर निकाय अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने में सफल होंगे और विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू कर सकेंगे।
