Villager killed in elephant attack in Doiwala; panic and outrage in the village.
डोईवाला के कांसरो वन रेंज क्षेत्र के झबरावाला गांव में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई। घटना शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान 55 वर्षीय जमील पुत्र असगर अली के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा रोष भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जमील अपने साथी नफीस के साथ स्कूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के खेतों के पास हाथीकुंड क्षेत्र में अचानक एक हाथी उनके सामने आ गया। हाथी को देखकर दोनों घबरा गए और वहां से भागने लगे। इसी दौरान हाथी ने जमील को अपनी चपेट में ले लिया और उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया। हमले में जमील गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्कूटी चला रहे नफीस ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के ग्रामीणों को मदद के लिए बुलाया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से घायल जमील को हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही कांसरो वन रेंज के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। हाथी सुरक्षा दीवार को या तो कूदकर या फिर तोड़कर खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों के सामने लगातार जान-माल का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी कदम उठाए जाएं। जमील की मौत के बाद गांव में एक तरफ शोक का माहौल है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों में आक्रोश भी है।
ग्राम प्रधान परमिंदर सिंह ने बताया कि मृतक जमील करीब 55 वर्ष के थे। वह खेती-किसानी के साथ मजदूरी का काम भी करते थे और अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। ग्राम प्रधान ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि क्षेत्र में हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।
परिजनों की ओर से शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। ग्राम प्रधान परमिंदर सिंह ने वन विभाग से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आबादी क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है और वन विभाग को इस गंभीर समस्या पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
