यूसीसी के तहत बिना शादी के लिव-इन जोड़ों को मिलेगा आशियाना, अब पंजीकरण से मिलेगा घर
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की नई नियमावली के तहत, अब उन युवा जोड़ों के लिए भी आशियाना मिल सकेगा जो बिना शादी के एक साथ रहने के लिए किराये पर घर नहीं ले पा रहे थे। यूसीसी में खासतौर पर ऐसे जोड़ों के लिए एक ऑनलाइन प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान किया गया है।
इस प्रावधान के तहत, यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहता है, लेकिन उनके पास अपना घर नहीं है, तो वे यूसीसी पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रोविजनल सर्टिफिकेट ले सकते हैं। यह सर्टिफिकेट 30 दिन तक वैध रहेगा, जिसे 15 दिन तक और बढ़ाया जा सकता है। इस सर्टिफिकेट के आधार पर, वे किराये का घर ले सकते हैं, और मकान मालिक यह कहकर कि उनकी शादी नहीं हुई है, लिव-इन रिलेशनशिप को मानने से इंकार नहीं कर सकते।
यूसीसी नियमावली समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह के अनुसार, यदि जोड़े के पास साझा आवास है तो उनका पंजीकरण एक संक्षिप्त जांच के बाद सीधे हो जाएगा। यदि आवास नहीं है, तो वे प्रोविजनल सर्टिफिकेट लेकर अगले 45 दिन के भीतर पोर्टल पर आवास प्रमाणपत्र दाखिल करके पूर्ण पंजीकरण करवा सकते हैं।
यूसीसी के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान:
- एक या दोनों साथी ऑनलाइन या ऑफलाइन लिव-इन रिलेशनशिप को समाप्त कर सकते हैं। यदि एक साथी आवेदन करता है, तो रजिस्ट्रार दूसरे साथी से पुष्टि कर इसे स्वीकार करेगा।
- यदि बच्चे का जन्म होता है, तो 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को इस बारे में सूचना देना अनिवार्य होगा। संबंधित विवादों का समाधान सिविल कोर्ट में होगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप में जाने या समाप्त करने की प्रक्रिया में शुल्क का भुगतान करना होगा।
कानूनी प्रावधान और सजा:
- यदि कोई जोड़ा एक महीने के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण नहीं कराता, तो उसे न्यायिक कार्रवाई के तहत तीन महीने की जेल, 10 हजार रुपये जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।
- यदि किसी ने पंजीकरण में गलत जानकारी दी, कागजात में जालसाजी की या सूचना छिपाई, तो उसे तीन महीने की सजा, 25 हजार रुपये जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।
- यदि कोई लिव-इन रिलेशनशिप में है और पंजीकरण नहीं करवाता, तो उसे रजिस्ट्रार से नोटिस मिलेगा। इसके बाद भी अगर पंजीकरण नहीं कराया तो छह महीने की सजा, 25 हजार रुपये जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती हैं।