The guidance of the Chief Minister and the efforts of DM Savin Bansal are yielding results, children are returning to the mainstream of education
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल की सतत निगरानी में भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी की काली दुनिया से निकाले गए बच्चों को शिक्षा की उजली राह पर लाने की पहल अब असर भी दिखाने लगी है। देहरादून स्थित साधुराम इंटर कॉलेज में विकसित राज्य के पहले आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर में इन बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संगीत, योग, कंप्यूटर व खेल गतिविधियों के जरिए सर्वांगीण विकास का माहौल भी मिल रहा है।
माइक्रोप्लान से सड़कों से कक्षा तक का सफर
जिलाधिकारी सविन बंसल के माइक्रोप्लान के तहत सड़क पर भीख मांगने वाले या मजदूरी कर रहे बच्चों को रेस्क्यू कर इस आधुनिक शेल्टर में लाया भी जा रहा है। यहां उन्हें विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा योग, नाटक, संगीत, खेल, कंप्यूटर जैसे विषयों में प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। बच्चों में शिक्षा के प्रति रुझान भी लगातार बढ़ रहा है, जो कि समाज के लिए सकारात्मक संकेत भी है।
अब तक 19 बच्चों का स्कूल में दाखिला
शेल्टर में प्रतिदिन 25 से 30 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अब तक 19 बच्चों का औपचारिक रूप से स्कूलों में दाखिला भी कराया जा चुका है। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक भोजन व नियमित कक्षाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। इस शेल्टर को निजी स्कूलों की तरह सुविधायुक्त भी बनाया गया है, ताकि इन बच्चों को किसी तरह की कमी ही महसूस न हो।
तकनीकी और कला शिक्षा से बच्चों को नई दिशा
इस आधुनिक केंद्र में बच्चों को केवल शैक्षिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि तकनीकी व कला आधारित शिक्षा भी दी जा रही है। कंप्यूटर लैब, संगीत कक्ष, लाइब्रेरी और ड्रॉइंग स्पेस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे बच्चों को एक सकारात्मक व प्रेरणादायक वातावरण मिल रहा है।
मुख्यधारा से जुड़ने की एक नई उम्मीद
यह पहल न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास व मानसिक संबल भी दिया जा रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों को भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी जैसे दलदल से निकालकर, एक सम्मानजनक भविष्य की ओर अग्रसर भी करना है।




