Setback for 10 producers under the Solar Self-Employment Scheme; demand for retaining old tariff rejected
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने वाले 10 उत्पादकों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने 31 मार्च 2026 की निर्धारित समयसीमा के बाद भी पुराने 4.64 रुपये प्रति यूनिट के टैरिफ का लाभ देने की मांग वाली सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहे कि उनके सोलर प्लांट तय समयसीमा तक बनकर तैयार हो गए थे।
दरअसल, चमोली जिले के 10 सोलर विकासकर्ताओं ने आयोग में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि उनके प्लांट समय पर तैयार हो गए थे, लेकिन उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से 11 केवी बिजली निकासी लाइन बिछाने में देरी की गई। इस कारण प्लांटों का कमीशनिंग नहीं हो सका। विकासकर्ताओं ने इसी आधार पर पुराने आरक्षित टैरिफ के अनुसार 4.64 रुपये प्रति यूनिट की दर देने की मांग की थी।
आयोग के चेयरमैन एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान सामने आया कि सोलर मॉड्यूल गुजरात के सूरत से 25 फरवरी से 17 मार्च 2026 के बीच भेजे गए थे। सूरत से चमोली तक करीब 1500 किलोमीटर की दूरी तय करने में पांच से छह दिन लगते हैं। ऐसे में 31 मार्च की समयसीमा तक चमोली के लासी गांव में सभी प्लांट स्थापित करना बेहद मुश्किल था। रिकॉर्ड के अनुसार, विकासकर्ताओं के बैंक ऋण भी जनवरी और फरवरी तक ही स्वीकृत हुए थे।
सुनवाई के दौरान विकासकर्ता सोलर मॉड्यूल के डिलीवरी चालान, केबल और स्ट्रक्चर खरीद की रसीदें तथा निर्माण के समय की तस्वीरें प्रस्तुत नहीं कर सके। आयोग को उपलब्ध कराई गई तस्वीरें भी निर्धारित समयसीमा के करीब पांच महीने बाद यानी 2 सितंबर 2026 की थीं। इसके अलावा, 10 प्लांटों के लिए जितनी क्षमता के सोलर पैनलों की जरूरत थी, बिलों में उससे काफी कम क्षमता के मॉड्यूल दर्ज पाए गए।
आयोग ने यह भी पाया कि पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) के नियमों के तहत ग्रिड से जुड़ने के लिए 60 दिन पहले नोटिस देना जरूरी था, जबकि विकासकर्ताओं ने 24 मार्च को ही प्लांट पूरा होने का दावा किया था। सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने माना कि प्लांटों के संचालन में हुई देरी बिजली निगम के कारण नहीं, बल्कि विकासकर्ताओं की ओर से समय पर जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं करने के चलते हुई।
आयोग के फैसले के बाद अब इन 10 सोलर प्रोजेक्ट्स को पुराने 4.64 रुपये प्रति यूनिट के टैरिफ का लाभ नहीं मिलेगा। इन्हें प्लांट की कमीशनिंग के समय लागू सामान्य टैरिफ के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
