नैनीताल का ऐतिहासिक रैमजे अस्पताल बदहाली का शिकार, निरीक्षण में हाल देख चौंके सांसद अजय भट्ट

नैनीताल। कभी पूरे कुमाऊं मंडल के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में गिने जाने वाला रैमजे (जीबी पंत) अस्पताल आज बदहाली व उपेक्षा का प्रतीक बन गया है। शहर के बीचों-बीच 27 एकड़ में फैला यह ऐतिहासिक अस्पताल वर्षों से लगभग बंद ही पड़ा है। अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थिएटर व कार्यालयों में ताले लटके हैं, जबकि खिड़कियां, दरवाजे व लकड़ी का ढांचा जर्जर भी हो चुका है।

शुक्रवार को सांसद अजय भट्ट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। यहां न डॉक्टर मिले, न मरीज और न ही स्वास्थ्य सेवाएं। मौजूद एक नर्स ने बताया कि

अस्पताल में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है व अब इसका इस्तेमाल कभी-कभार फिल्मों व वेब सीरीज की शूटिंग के लिए भी किया जाता है।

स्थिति देखकर सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से फोन पर बात कर अस्पताल के पुनर्जीवन के लिए समिति गठित करने का अनुरोध भी किया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। सांसद ने केंद्र सरकार से भी मदद दिलाने का आश्वासन भी दिया।

वर्ष 1893 में ब्रिटिश काल में स्थापित यह अस्पताल कभी देशभर के मरीजों के लिए भरोसे का केंद्र भी माना जाता था। वर्तमान में यहां केवल डायलिसिस सेवा संचालित भी हो रही है, जिसका संचालन और संसाधन हंस फ़ाउंडेशन द्वारा उपलब्ध भी कराए गए हैं।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां तैनात एकमात्र चिकित्सक पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर हैं, जबकि अस्पताल के सुधार से जुड़े कई प्रस्ताव अभी भी लंबित भी पड़े हुए हैं।