Government requested to lift the High Court's ban on Uttarakhand Panchayat elections, hearing will be held today
नैनीताल | बच्ची से दुष्कर्म के गंभीर मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को जांच की निगरानी स्वयं करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने कहा कि हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए। इसके साथ ही अदालत ने मामले में पुलिस की तत्परता व प्रभावी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि “जहां प्रशासन और पालिका असफल रहे, वहां पुलिस ने हालात बिगड़ने से रोके।”
सीबीआई जांच और आरोपी परिजनों को अभियुक्त बनाने की मांग
पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिव भट्ट ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर घटना की CBI जांच और POSCO एक्ट की धाराओं के तहत आरोपी के परिजनों को भी अभियुक्त बनाए जाने की मांग की है। याचिका में दावा किया गया है कि दुष्कर्म की घटना गैराज में हुई, जहां पीड़िता को चाकू से डराया भी गया था। उन्होंने कहा कि आरोपी के परिवार ने सबूत मिटाने और पीड़िता को धमकाने में भूमिका निभाई, बावजूद इसके उन्हें पुलिस सुरक्षा भी दी जा रही है।
आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट भी लगा
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष वर्चुअली उपस्थित एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने बताया कि पीड़िता की जाति के आधार पर आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट भी लगाया गया है। मामले की जांच अब डीएसपी स्तर के अधिकारी से ही कराई जा रही है।
कोर्ट ने प्रशासन और नगर पालिका को लगाई फटकार
हाईकोर्ट ने एक बार फिर नगर पालिका और जिला प्रशासन की भूमिका पर नाराजगी भी जताई। अदालत ने कहा कि इन संस्थाओं की निष्क्रियता के कारण पुलिस पर अनावश्यक दबाव भी आया। कोर्ट को यह भी बताया गया कि आरोपी उस्मान समेत 62 लोगों को जारी किए गए नोटिस निरस्त भी कर दिए गए हैं।
आरोपी की पत्नी को कोर्ट से झटका
आरोपी उस्मान की पत्नी हुस्न बानो ने सुरक्षा की मांग और नोटिस के जवाब के लिए 3 माह का समय मांगा था। कोर्ट ने साफ कहा कि नोटिस पहले ही वापस लिया जा चुका है, इसलिए यह मांग अब प्रासंगिक नहीं है।
गंभीर आरोप, लेकिन मुआवजा नहीं
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी परिवार के डीएनए, फिंगरप्रिंट व मोबाइल लोकेशन अब तक एकत्र नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही पीड़िता को अब तक कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया है, जो कि कानूनन उसका अधिकार है।
