Major ruling by the Uttarakhand Consumer Commission Insurance compensation will not exceed the vehicle's IDV.
देहरादून। उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वाहन बीमा से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बीमाधारक को गाड़ी की घोषित बीमित कीमत यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) से अधिक मुआवजा नहीं दिया जा सकता। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, ऊधम सिंह नगर के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें बीमा कंपनी को वाहन की बीमित राशि से अधिक मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
राज्य आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति कुमकुम रानी और सदस्य बी.एस. मनराल की पीठ ने काशीपुर निवासी ऋषभ से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। ऋषभ ने अपनी फोर्ड फिगो कार का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से 3 लाख 25 हजार रुपये की बीमित राशि पर बीमा कराया था। अगस्त 2016 में सड़क दुर्घटना के दौरान अचानक सामने आए जानवर को बचाने की कोशिश में उनकी कार अनियंत्रित होकर खंती में गिर गई। इसके बाद कार में आग लग गई और वाहन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया।
हादसे के बाद ऋषभ ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम पेश किया, लेकिन कंपनी ने सर्वेक्षक की रिपोर्ट और कुछ तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया। इसके बाद ऋषभ ने जिला उपभोक्ता आयोग में सेवा में कमी की शिकायत दर्ज कराई।
जिला आयोग ने 25 मार्च 2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 3 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था। इसके अलावा कंपनी को पांच हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देने को कहा गया था। हालांकि, वाहन की बीमित कीमत 3 लाख 25 हजार रुपये होने के कारण बीमा कंपनी ने इस आदेश को राज्य आयोग में चुनौती दी।
अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य आयोग ने पाया कि जिला आयोग की ओर से तय की गई मुआवजा राशि वाहन की कुल बीमित कीमत से अधिक थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा पॉलिसी के तहत वाहन की निर्धारित IDV से अधिक मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर मुआवजे की राशि 3 लाख 50 हजार रुपये से घटाकर 2 लाख 69 हजार रुपये कर दी गई।
हालांकि, राज्य आयोग ने जिला आयोग के सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के आदेश को बरकरार रखा। आयोग ने माना कि बीमा क्लेम के भुगतान में देरी हुई थी। इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि वाहन बीमा से जुड़े मामलों में मुआवजे की गणना करते समय निर्धारित बीमित मूल्य महत्वपूर्ण होगा।
इसी बीच, उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े एक अन्य मामले में बैंक को राहत देते हुए आलोक कुमार त्यागी की उपभोक्ता शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग के छह जनवरी 2022 के आदेश को भी रद्द कर दिया।
जिला आयोग ने बैंक को करीब 2 लाख 27 हजार रुपये ब्याज सहित भुगतान करने के साथ मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने का निर्देश दिया था। यह मामला मेसर्स अर्चना एंटरप्राइजेज के बैंक खाते से संबंधित था। राज्य आयोग के फैसले के बाद जिला आयोग का उक्त आदेश निरस्त हो गया।
