तुंगनाथ-चोपता में बढ़ता पर्यटन बना खतरा, प्लास्टिक और शोर से संकट में हिमालयन मोनाल
उत्तराखंड के तृतीय केदार तुंगनाथ व चोपता घाटी की प्राकृतिक सुंदरता पर बढ़ते पर्यटन का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। प्लास्टिक कचरा, अस्थायी शौचालयों की गंदगी व अनियंत्रित भीड़ के कारण हिमालयी बुग्याल सिकुड़ रहे हैं, जिससे राज्य पक्षी हिमालयन मोनाल समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित भी हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मानवीय गतिविधियां इस संकट को और गंभीर भी बना रही हैं।
पर्यावरणविदों व वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यटकों की लापरवाही, प्लास्टिक प्रदूषण और हेलीकॉप्टरों व वाहनों का शोर मोनाल के भोजन, प्रजनन व संचार व्यवहार को प्रभावित कर रहा है। स्थानीय लोगों ने भी बुग्यालों में बढ़ती गंदगी और जैव-विविधता को हो रहे नुकसान पर चिंता भी जताई है। विशेषज्ञों ने प्लास्टिक पर सख्त नियंत्रण, कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था व जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर भी दिया है।