High Court's key directives regarding the safety of school vehicles
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की परिवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (डीएसवीएससी) की नियमित बैठकें कराने और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (एसटीएससी) के कामकाज की निगरानी करने को कहा है। अदालत ने सीबीएसई और आईसीएसई को भी मामले में पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में स्कूलों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। 15 सितंबर को परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी अदालत में उपस्थित हुए थे।
परिवहन आयुक्त ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (छब्बीसवां संशोधन) नियम, 2019 का अध्ययन अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नियम 222ए के तहत स्कूली वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है, जिसमें शिक्षण संस्थानों और निजी बसों के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं। नियम 222ई के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, नियम 222जी के तहत गठित समिति वर्तमान में कार्यरत नहीं है।
अदालत ने जिलाधिकारियों को नियम 222जी के तहत विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का विधिवत गठन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। समितियों को नियमों के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। मुख्य सचिव को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित निर्देश जारी करने होंगे। वहीं, जिलाधिकारियों को एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
