Gauradevi Birth Centenary Year 'Gauradevi Smriti Van' will be built in every forest division of Uttarakhand
देहरादून : पर्यावरण संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय प्रतीक और चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी के जन्म शताब्दी वर्ष को उत्तराखंड सरकार ने विशेष पहल के साथ यादगार बनाने का फैसला भी किया है। वन विभाग ने घोषणा की है कि राज्य के सभी 38 वन डिविजन में ‘गौरा देवी स्मृति शताब्दी वन’ स्थापित भी किए जाएंगे। हर स्मृति वन में फलदार और स्थानीय प्रजातियों के हजारों पौधे भी रोपे जाएंगे, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।
“प्रत्येक डिविजन में फलदार वृक्षों से सुसज्जित स्मृति वन तैयार भी किया जाएगा, जिसे ‘गौरा देवी स्मृति शताब्दी वन’ नाम भी दिया जाएगा।”
— समीर सिन्हा, प्रमुख वन संरक्षक (HoFF), उत्तराखंड
चिपको आंदोलन की विरासत को सहेजने की पहल
1970 के दशक में गौरा देवी ने रेणी गांव (चमोली) की महिलाओं के साथ पेड़ों से चिपक कर जंगल काटने से भी रोका था। इस आंदोलन ने ‘पर्यावरण बचाओ’ की वैश्विक अलख जगाई व महिलाओं की भागीदारी को दुनिया के सामने भी रखा। शताब्दी वर्ष पर स्मृति वन बनाकर राज्य सरकार उसी भावना को नई पीढ़ी तक भी पहुंचाना चाहती है।
हरेला पर्व भी गौरा देवी को समर्पित
उत्तराखंड का पारंपरिक हरेला उत्सव (16 जुलाई) इस बार गौरा देवी की याद में ही मनाया जाएगा। गांव‑गांव में सामूहिक पौधरोपण, वन पंचायतों के प्रशिक्षण व जन‑जागरूकता अभियानों की श्रृंखला भी चलेगी, ताकि वन संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी न रहकर जन‑आंदोलन भी बने।
राज्य स्थापना के रजत वर्ष पर ‘हरा संदेश’
संयोग से यह वर्ष उत्तराखंड स्थापना का 25वां (रजत) वर्ष भी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 को “हरित विकास वर्ष” के रूप में याद रखा जाए, जिसमें फलदार वृक्षों की बड़े पैमाने पर रोपाई से आजीविका के अवसर भी बढ़ें।
आगे की राह
- 38 स्मृति वन: प्रत्येक वन डिविजन में कम से कम 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल।
- फलदार फोकस: किनू, अखरोट, बुरांस, माल्टा जैसी स्थानीय प्रजातियाँ प्राथमिकता।
- सामुदायिक भागीदारी: वन पंचायतों, महिला समूहों और स्कूलों की सक्रिय भूमिका।
- निगरानी व्यवस्था: ड्रोन सर्वे और मोबाइल‑ऐप के जरिये पौधों के संरक्षण पर नजर।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह पहल ग्रीन कवर बढ़ाने के साथ‑साथ गौरा देवी के चिपको संदेश को सदियों तक जीवित रखेगी और आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण सुरक्षा का पाठ भी सिखाएगी।
