Dinesh Arya filed his nomination for the Rajya Sabha; he submitted his papers in the presence of CM Dhami and BJP leaders.
देहरादून। उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने मंगलवार को विधानसभा में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव हेमचंद पंत को नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।
नामांकन के लिए दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विधानसभा पहुंचे। विधानसभा परिसर में भाजपा के कई विधायक और सांसद भी मौजूद रहे। भाजपा ने उत्तराखंड की उस राज्यसभा सीट के लिए आर्य को प्रत्याशी बनाया है, जिस पर मौजूदा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 16 अक्टूबर को मतदान और उसी दिन मतगणना होनी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दिनेश आर्य को पार्टी का वरिष्ठ और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि आर्य जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और संगठन को मजबूत करने में उनका योगदान रहा है। भट्ट के मुताबिक, खास तौर पर कुमाऊं क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में आर्य की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश के विभिन्न वर्गों में इस फैसले को लेकर उत्साह है।
दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उत्तराखंड में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। वर्तमान में उत्तराखंड की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट और कल्पना सैनी सदस्य हैं। आर्य को नरेश बंसल के कार्यकाल पूरा होने वाली सीट के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।
दिनेश आर्य लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। वह नैनीताल जिले में पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और अनुसूचित जाति मोर्चे में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी।
आर्य की उम्मीदवारी को लेकर हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुए शुद्धीकरण हवन से जुड़े राजनीतिक विवाद का संदर्भ भी सामने आया है। कुछ राजनीतिक विश्लेषणों में इसे सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को उस विवाद से नहीं जोड़ा है। इसलिए इस पहलू को पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के व्यापक समीकरण के संदर्भ में ही देखा जाना उचित है।
राज्यसभा प्रत्याशी बनने के साथ ही दिनेश आर्य की विधानसभा टिकट को लेकर चल रही संभावित दावेदारी भी अब अलग दिशा में चली गई है। भाजपा में उनके संगठनात्मक अनुभव और लंबे समय से सक्रिय राजनीतिक भूमिका को देखते हुए राज्यसभा के लिए उनका चयन पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है।
