Dispute over data in Pradhan Mantri Awas Yojana High Court grants relief to dismissed contractual worker, stays new appointment
नैनीताल: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की जियोटैगिंग और कार्यों की प्रगति के आंकड़ों में कथित विरोधाभास के मामले में नौकरी से हटाए गए संविदाकर्मी विस्तार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए शहरी विकास निदेशक से जवाब मांगा है। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित पद पर नई नियुक्ति करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ में हुई। इस दौरान शहरी विकास निदेशक विनोद गोस्वामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि विस्तार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई सीडीओ पौड़ी अथवा संबंधित अधिकारी से मिली रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। हालांकि, भारत सरकार के भुवन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और विभागीय रिपोर्ट में अंतर को लेकर अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
2019 से संविदा पर कार्यरत थे विस्तार गुप्ता
याचिका के अनुसार, विस्तार गुप्ता वर्ष 2019 से उत्तराखंड शहरी विकास निदेशालय, रुड़की के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत थे। उनकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्ण हुए मकानों का रिकॉर्ड रखना, उनकी जियोटैगिंग करना और योजना में संभावित अनियमितताओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना थी।
विस्तार गुप्ता का कहना है कि रुड़की नगर निगम में काम के दौरान उन्होंने कुछ अनियमितताएं सामने आने पर शिकायत की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद उन्हें ही नौकरी से हटा दिया गया।
100 मकानों में से दो का काम पूरा होने का आरोप
17 मार्च 2026 को जारी टर्मिनेशन आदेश में विस्तार गुप्ता पर आरोप लगाया गया था कि निर्धारित 100 मकानों में से उन्होंने केवल दो मकानों का काम पूरा किया।
विस्तार गुप्ता ने इस आंकड़े पर सवाल उठाते हुए अदालत को बताया कि भुवन पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, उनके कार्यकाल में 67 से 70 प्रतिशत तक काम पूरा हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा किए गए कार्यों का विवरण पोर्टल पर उपलब्ध है और उसका विभागीय रिपोर्ट से मिलान किया जा सकता है।
उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को साजिश का हिस्सा बताते हुए टर्मिनेशन आदेश को चुनौती दी है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने शहरी विकास निदेशक से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक संबंधित पद पर नई नियुक्ति पर रोक लगा दी है।
