During his five-year tenure, Governor Gurmeet Singh remained deeply connected with the people of Uttarakhand, focusing on issues ranging from curbing migration to education and women's empowerment.
उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश की जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। सैन्य जीवन से मिली अनुशासनप्रियता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं रहीं। उन्होंने लोकभवन की औपचारिक सीमाओं से आगे बढ़कर आम लोगों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और पूर्व सैनिकों से जुड़ने का प्रयास किया। उनकी कार्यशैली में सीमांत क्षेत्रों के विकास, शिक्षा में नवाचार, महिला सशक्तीकरण और स्थानीय आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को विशेष स्थान मिला।
गुरमीत सिंह ने 15 सितंबर 2021 को उत्तराखंड के राज्यपाल का पदभार संभाला था। 15 सितंबर 2026 को उनके कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे हुए। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास से जुड़े कई विषयों पर विशेष ध्यान दिया। उनके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में रिवर्स पलायन, बागवानी और जैविक खेती, महिला सशक्तीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं तकनीकी नवाचार शामिल रहे। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों की खेती, होमस्टे, स्वयं सहायता समूहों, मोटे अनाज और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
सीमांत क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझने के लिए उन्होंने कई गांवों का दौरा किया। वह माणा गांव में रात्रि प्रवास करने वाले पहले राज्यपाल बने। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत चयनित गांवों में विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी उन्होंने प्रयास किए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने 57 में से 32 वाइब्रेंट विलेज का दौरा किया और स्थानीय लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं तथा जरूरतों को समझा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने विश्वविद्यालयों को शोध और नवाचार से जोड़ने की पहल की। उनकी ओर से शुरू कराई गई ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ पहल का उद्देश्य प्रत्येक विश्वविद्यालय को किसी विशिष्ट क्षेत्रीय या वैश्विक समस्या के समाधान पर केंद्रित करना था। इसके अलावा, एआई और उभरती तकनीकों को प्रोत्साहित करने के साथ युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए जन-जागरूकता अभियान को भी उन्होंने प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया।
महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न प्रयास किए गए। स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों, जैविक खेती और होमस्टे जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। उनकी धर्मपत्नी और प्रथम महिला गुरमीत कौर ने भी प्रदेशभर में स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक मंचों से जुड़कर महिलाओं के आत्मविश्वास तथा सहभागिता को बढ़ावा देने में योगदान दिया।
गुरमीत सिंह ने पूर्व सैनिकों के कल्याण, युवाओं के भविष्य और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को भी अपने कार्यकाल में महत्व दिया। लोकभवन में आम लोगों की पहुंच आसान बनाने के प्रयासों के जरिए जनता और राजभवन के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया गया।
आधुनिक तकनीक और नवाचार में रुचि रखने के साथ गुरमीत सिंह का आध्यात्मिक पक्ष भी उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रहा। हिमालय की सांस्कृतिक विरासत और उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं के प्रति उनका विशेष लगाव रहा। भगवान शिव के उपासक गुरमीत सिंह ने लोकभवन परिसर में शिव मंदिर का निर्माण भी कराया।
अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में गुरमीत सिंह ने सीमांत गांवों के विकास, शिक्षा, तकनीकी नवाचार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके कार्यकाल की ये पहलें उत्तराखंड में जनसंपर्क और विकास संबंधी प्राथमिकताओं के लिहाज से उल्लेखनीय रहीं।
