Concerns rise in the Ghad region following the Dhanauri accident; dilapidated buildings and bridges pose a danger.
हरिद्वार के धनौरी में हुए हादसे के बाद अब पूरे घाड़ क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कई जगहों पर भू-धंसाव का खतरा बना रहता है। रतमऊ नदी के आसपास ऊपर से भले ही रेत बहती दिखाई देती है, लेकिन नीचे पानी की धारा लगातार अपना असर डालती रहती है।
धनौरी में खेत में बने कॉलेज भवन के धंसने की घटना ने भी निर्माण की गुणवत्ता और जमीन की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि भवन की दीवारों में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं। गनीमत रही कि हादसा कक्षाएं संचालित होने के दौरान नहीं हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस, पीएसी, फायर और आपदा राहत दल मौके पर पहुंचा और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
एसपी देहात अभय प्रताप सिंह के मुताबिक, घटना की सूचना समय पर मिलने और घटनास्थल थाने से महज करीब पांच मिनट की दूरी पर होने के कारण पुलिस का क्विक रिस्पॉन्स संभव हो सका। रुड़की से भी पुलिस टीम करीब 15 मिनट में मौके पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी संबंधित तंत्र को सक्रिय कर दिया था। स्थानीय लोगों, पीएसी कर्मियों और कॉलेज प्रबंधन ने भी तत्काल सहायता नंबरों पर सूचना दी, जिसके बाद सभी टीमों ने आपसी समन्वय और तकनीकी संसाधनों के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया।
हालांकि इस हादसे में एक जवान की जान चली गई, लेकिन समय पर राहत और बचाव दल के पहुंचने से अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली। एसपी देहात ने कहा कि किसी भी हादसे में समय पर सही सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण है और इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
घाड़ क्षेत्र में विशेषज्ञ मृदा परीक्षण के बाद ही निर्माण करने की सलाह देते हैं। धनौरी क्षेत्र में कई सरकारी भवन भी जर्जर हालत में हैं। खास तौर पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन आने वाले कई भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खराब हो चुके हैं। इनमें से एक जर्जर भवन में पुलिस चौकी भी संचालित हो रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई भवनों की दीवारों में दरारें हैं और छत व प्लास्टर भी खराब स्थिति में हैं। अधिकतर भवन खाली पड़े हैं, लेकिन पुलिस चौकी वाले भवन में पुलिसकर्मी लगातार काम करते हैं और आम लोगों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में इसकी जर्जर स्थिति सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है। लोगों ने भवन का तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है।
वहीं, धनौरी में पुरानी गंगनहर पर बने कई पुल भी जर्जर बताए जा रहे हैं। नेशनल इंटर कॉलेज के सामने नया पुल बन चुका है, लेकिन करीब डेढ़ सौ साल पुराने पुल से अब भी भारी वाहनों की आवाजाही जारी है। पुल पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से जर्जर होने का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
हरिद्वार से हरियाणा और पंजाब की ओर जाने वाले यात्री वाहन और मालवाहक वाहन भी इस पुल से गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पुल की तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। धनौरी के हालिया हादसे के बाद अब क्षेत्र के जर्जर भवनों, पुलों और जमीन की स्थिति की गंभीरता से जांच कराने की मांग उठने लगी है।
