Shocking land fraud case in Dehradun Living person declared dead in official records.
देहरादून में साइबर ठगी के साथ – साथ जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले भी सामने आ रहे हैं। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें आरोप है कि एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाकर उसकी जमीन हड़पने की कोशिश भी की गई। इतना ही नहीं, उसकी मौत व अंतिम संस्कार की फर्जी श्मशान घाट रसीद तक तैयार कराने का आरोप भी है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है।
1995 में तैयार की गई कथित फर्जी वसीयत
पुलिस के मुताबिक, सिमलासग्रांट, डोईवाला निवासी श्यामलाल ने न्यायालय में शिकायत भी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता ताराचंद को जीवित रहते ही मृत दिखाकर उनकी जमीन से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 1995 में ताराचंद के नाम से कथित फर्जी वसीयत भी तैयार की गई। इसके बाद उनकी मृत्यु 14 जून 2002 को होने का उल्लेख करते हुए श्मशान घाट की कथित फर्जी रसीद तैयार की गई।
असली मृत्यु 2016 में हुई
शिकायतकर्ता का कहना है कि ताराचंद की वास्तविक मृत्यु 20 नवंबर 2016 को भी हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद ग्राम पंचायत सिमलासग्रांट की ओर से विधिवत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
आरोप है कि फर्जी वसीयत, मृत्यु की कथित फर्जी रसीद व अन्य दस्तावेजों के आधार पर ईस्ट हॉप टाउन स्थित करीब 0.4050 हेक्टेयर जमीन के राजस्व अभिलेखों में आरोपियों के पक्ष में प्रविष्टियां दर्ज भी करा दी गईं।
इससे ताराचंद के कानूनी वारिसों को आर्थिक नुकसान और आरोपियों को अवैध लाभ पहुंचने का आरोप भी लगाया गया है।
तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
प्रेमनगर थाना पुलिस ने मामले में देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज के मालिक के बेटे संजय कुमार चौधरी, उनकी मां ओमवती व चंद्रावती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
प्रेमनगर थाना प्रभारी गिरीश नेगी ने बताया कि पीड़ित श्यामलाल की शिकायत के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 216/2026 दर्ज भी किया गया है। आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506 व 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। फर्जी दस्तावेजों, कथित वसीयत, मृत्यु प्रमाण पत्र व श्मशान घाट की रसीद समेत अन्य रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप पुलिस शिकायत व दर्ज मुकदमे पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
