Kichha municipal election turns into a battle of prestige between Behad and Shukla.
नगर पालिका परिषद किच्छा का चुनाव इस बार सिर्फ चेयरमैन चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं ने अपने-अपने समर्थित प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है और जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
कांग्रेस ने राजेश प्रताप सिंह को, जबकि भाजपा ने संदीप अरोरा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस समर्थित अब्दुल रशीद जक्कू ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। अगर वह नामांकन वापस नहीं लेते हैं तो कांग्रेस के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
किच्छा विधानसभा में सिख, बंगाली, पंजाबी और मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं। भाजपा जहां विकास और ट्रिपल इंजन के मुद्दे पर मैदान में है, वहीं कांग्रेस जलभराव और भ्रष्टाचार जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रही है।
सिरौलीकलां में कांग्रेस ने राशिदा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि निर्दलीय फरहीन जहां और जैबुलनिशा भी मैदान में हैं। भाजपा फिलहाल एक निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थन में नजर आ रही है।
विधायक तिलक राज बेहड़ ने कहा कि नगर पालिका को भ्रष्टाचार का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए पार्टी पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। वहीं, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने दावा किया कि जनता भाजपा के साथ है और उनका प्रत्याशी मजबूती से चुनाव जीतेगा।
कुल मिलाकर किच्छा पालिका चुनाव का परिणाम दोनों नेताओं की राजनीतिक पकड़ और आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव से पहले के समीकरणों पर असर डाल सकता है।
