विकासनगर उप निबंधक कार्यालय में बड़ा खुलासा, स्टांप चोरी और अवैध रजिस्ट्रियों पर डीएम का एक्शन

देहरादून के विकासनगर स्थित उप निबंधक कार्यालय में जिलाधिकारी सविन बंसल के औचक निरीक्षण में स्टांप चोरी व गंभीर अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन व अन्य विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भी भेज दी है।

जानकारी के अनुसार, 4 मई को जिलाधिकारी ने विकासनगर उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण भी किया था। इस दौरान कार्यालय में कई महत्वपूर्ण अभिलेख संदिग्ध स्थिति में भी मिले, जिसके बाद उन्हें तत्काल जब्त कर जांच भी शुरू कर दी गई। जांच में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के मूल विलेख पत्र कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में भी पाए गए। साथ ही कई पंजीकृत दस्तावेज महीनों व वर्षों तक कार्यालय में रोके जाने के तथ्य सामने भी आए हैं।

निरीक्षण के दौरान कार्यालय में 25 रजिस्ट्रियां बिना किसी स्पष्ट कारण के वर्षों से लंबित व डंप पाई गईं। पूछताछ में संबंधित अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब ही नहीं दिया जा सका। इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश से प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट खातों में करीब 150 अवैध रजिस्ट्रियां पकड़ी गई हैं।

प्रारंभिक जांच में प्रतिबंधित भूमि की बिक्री व रजिस्ट्रियों के मामले सामने आए हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन भी माना जा रहा है। जिला प्रशासन के मुताबिक, गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित जमीनों की सैकड़ों रजिस्ट्रियां किए जाने की जानकारी भी मिली है। इसमें तत्कालीन कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच में धारा 47-ए के तहत स्टांप शुल्क चोरी से जुड़े 47 प्रकरण भी चिन्हित भी किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह मामला करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान से जुड़ा भी हो सकता है। साथ ही अवैध रजिस्ट्रियों के कारण भूमि खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी जैसी स्थिति पैदा हुई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जिला प्रशासन राजस्व व भूमि मामलों में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम भी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शी व जवाबदेह प्रशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार ही  जारी रहेगी।

निरीक्षण में कार्यालय संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन व प्रक्रियात्मक नियमों के पालन में भी गंभीर खामियां पाई गई हैं। जिला प्रशासन ने वर्तमान और पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रारों के कार्यकाल की गतिविधियों की जांच भी शुरू कर दी है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है ताकि दोषियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जा सके।