केदारनाथ यात्रा मार्ग का लिनचोली क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से संवेदनशील, वाडिया संस्थान ने दिए सुरक्षा सुझाव
केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर स्थित लिनचोली क्षेत्र को हिमस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील भी माना गया है। यह खुलासा वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के हालिया अध्ययन में ही हुआ है। संस्थान ने जोखिम कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं, जिनमें वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की सिफारिश प्रमुख भी है।
अध्ययन के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच केदारनाथ के उत्तर में स्थित ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार हिमस्खलन की घटनाएं भी दर्ज की गईं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये हिमस्खलन केदारनाथ धाम से काफी दूर ऊंचाई वाले इलाकों में हुए थे और इससे मंदिर क्षेत्र को कोई सीधा खतरा ही नहीं है।
हालांकि, लिनचोली क्षेत्र के ऊपर लगभग 500 मीटर का हिस्सा हिमस्खलन जोन के रूप में चिन्हित भी किया गया है। यहां सर्दियों में भारी बर्फ जमा होती है और वसंत व गर्मियों की शुरुआत में तापमान बढ़ने पर बर्फ अस्थिर होकर हिमस्खलन का कारण भी बनती है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि पर्यटन गतिविधियों व निर्माण कार्यों के कारण जोखिम बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस संवेदनशील क्षेत्र से हर मिनट 100 से 200 यात्री गुजरते हैं, इसलिए प्रभावी जोखिम प्रबंधन भी जरूरी है।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि लिनचोली क्षेत्र, जो केदारनाथ यात्रा मार्ग पर किलोमीटर 9 से 11 के बीच स्थित है, पहले से ही हिमस्खलन व भूस्खलन संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित है। यहां राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत कई सुरक्षात्मक कार्य भी किए गए हैं। साथ ही कटाव रोकने के लिए गेबियन संरचनाएं भी बनाई गई हैं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलिंग व चेतावनी संबंधी साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं।
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. मनीष मेहता ने बताया कि वर्ष 2024 में की गई इस स्टडी में कई अहम सुझाव भी शामिल हैं। रिपोर्ट में 2013 से पहले वाले पुराने रास्ते को दोबारा खोलने, हिमस्खलन जोन के निचले हिस्सों में चेक डैम जैसी संरचनाएं बनाने व प्रस्तावित रोपवे के टॉवर एवलांच जोन से 200 से 300 मीटर दूर स्थापित करने की सिफारिश भी की गई है। संस्थान का यह शोध नोट हाल ही में भारतीय भूगर्भीय सोसायटी में प्रकाशित भी हुआ है।