Yamunotri Highway Update The road remained closed on Silai Band Ojri for the fourth day, problems of passengers and villagers increased
देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड में मानसून के दस्तक देते ही पर्वतीय जिलों में हालात भी बिगड़ने लगे हैं। यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड ओजरी के पास भूस्खलन के चलते चौथे दिन भी यातायात पूरी तरह से ठप है। स्थानीय लोग जोखिम उठाकर पैदल आवाजाही भी कर रहे हैं। वहीं, यमुनोत्री हाईवे का एक और हिस्सा डामटा के पास मलबा आने के कारण बंद भी हो गया है।
एनएच विभाग सक्रिय, डामटा मार्ग खोलने के प्रयास जारी
एनएच के अधिशासी अभियंता (ईई) मनोज रावत ने बताया कि
डामटा क्षेत्र में मार्ग को सुचारू करने के निर्देश भी दिए गए हैं और मशीनें मौके पर तैनात हैं।
राज्यभर में 111 सड़कें बंद
बारिश के बाद उत्तराखंड में मलबा आने व भूस्खलन की वजह से राज्य की 111 सड़कों पर यातायात भी ठप हो गया है। इससे न केवल पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि ग्रामीणों को भी भारी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है।
जिलावार स्थिति इस प्रकार है:
- रुद्रप्रयाग: 8 ग्रामीण सड़कें बंद
- उत्तरकाशी: 9 ग्रामीण सड़कें
- चमोली: 21 ग्रामीण मार्ग
- पिथौरागढ़: 3 सड़कें
- अल्मोड़ा: 1 राज्यमार्ग, 3 ग्रामीण सड़कें
- बागेश्वर: 12 सड़कें
- चंपावत: 4 सड़कें
- पौड़ी गढ़वाल: 25 सड़कें
- नैनीताल: 1 सड़क
- देहरादून: 1 राज्यमार्ग, 9 ग्रामीण मार्ग
- टिहरी गढ़वाल: 13 ग्रामीण सड़कें बंद
प्रशासन जुटा राहत कार्यों में
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि
बंद सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी मशीनें भी लगाई गई हैं और लगातार कार्य भी किया जा रहा है। हालांकि, कई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा भी बन रही है।
ग्रामीणों को भारी परेशानी
सड़कें बंद होने से न सिर्फ दैनिक जरूरतों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, बल्कि बीमार लोगों व स्कूली बच्चों को भी आवागमन में मुश्किलें भी झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचार व चिकित्सा सेवाएं भी बाधित हुई हैं।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
इधर, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी भी दी है, जिससे हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
सरकार से मांग: वैकल्पिक व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था करे और आपात स्थिति से निपटने के लिए तेज़ी से काम भी करे। बारिश का यह दौर अगर यूं ही जारी रहा तो आपदा की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
